ODOC योजना को मिलेगी नई रफ्तार, व्यंजनों की लिस्ट तैयार करेंगी यूनिवर्सिटी; IIT कानपुर को अहम जिम्मेदारी

राज्य सरकार की एक जिला एक उत्पाद (ODOC) योजना को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। MSME डिपार्टमेंट ने इस योजना के तहत जिलेवार पारंपरिक और स्थानीय व्यंजनों की सूची तैयार करने की जिम्मेदारी देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को सौंपी है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय खानपान को संगठित रूप से बढ़ावा देना, उन्हें ब्रांडिंग के साथ बाजार से जोड़ना और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
सूत्रों के अनुसार, इस कार्य में IIT कानपुर के साथ-साथ राज्य और केंद्र के कई अन्य विश्वविद्यालयों को भी शामिल किया गया है। ये संस्थान अपने-अपने क्षेत्रों में प्रचलित पारंपरिक व्यंजनों की पहचान करेंगे, उनके कच्चे माल, बनाने की विधि, पोषण मूल्य, पैकेजिंग और व्यावसायिक संभावनाओं पर विस्तृत अध्ययन करेंगे। इसके आधार पर एक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से तैयार की गई व्यंजन सूची तैयार की जाएगी, जिसे ODOC योजना से जोड़ा जाएगा।
MSME डिपार्टमेंट का मानना है कि अभी तक ODOC योजना मुख्य रूप से हस्तशिल्प, कारीगरी और औद्योगिक उत्पादों तक सीमित रही है, जबकि स्थानीय फूड प्रोडक्ट्स और पारंपरिक व्यंजन भी बड़े स्तर पर रोजगार और निर्यात की क्षमता रखते हैं। विश्वविद्यालयों की मदद से इन व्यंजनों को गुणवत्ता मानकों, फूड सेफ्टी नियमों और आधुनिक पैकेजिंग के अनुरूप ढालने में सहायता मिलेगी।
इस पहल से स्थानीय उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, महिलाओं और स्टार्टअप्स को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। व्यंजनों की सूची तैयार होने के बाद सरकार प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, ब्रांडिंग और मार्केटिंग सपोर्ट भी उपलब्ध कराएगी। इससे छोटे स्तर पर शुरू होने वाले फूड बिजनेस को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, IIT कानपुर जैसे तकनीकी संस्थान प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी, शेल्फ लाइफ बढ़ाने और लागत कम करने जैसे पहलुओं पर अहम भूमिका निभा सकते हैं। वहीं, अन्य विश्वविद्यालय स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए व्यंजनों की पहचान करेंगे, जिससे क्षेत्रीय पहचान भी मजबूत होगी।
कुल मिलाकर, MSME डिपार्टमेंट का यह कदम ODOC योजना को खानपान और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर से जोड़कर इसे एक नया आयाम देगा। इससे न केवल स्थानीय स्वादों को नई पहचान मिलेगी, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन को भी मजबूत आधार मिलेगा।



