
वैष्णो देवी में प्रस्तावित रोपवे परियोजना को लेकर एक बार फिर विरोध तेज हो गया है। घोड़े-पिट्टू और पालकी से जुड़े मजदूरों का कहना है कि रोपवे बनने से उनका रोजगार पूरी तरह खत्म हो जाएगा, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा।
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने सरकार और श्राइन बोर्ड के सामने मांग रखी है कि यदि रोपवे परियोजना लागू की जाती है तो हर प्रभावित मजदूर को कम से कम 20 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि यही उनकी वर्षों की मेहनत और रोज़गार के नुकसान की भरपाई कर सकता है।
घोड़े-पिट्टू यूनियनों का आरोप है कि प्रशासन उनकी बात सुने बिना ही परियोजना को आगे बढ़ा रहा है। मजदूरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
वहीं प्रशासन का कहना है कि रोपवे परियोजना श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित की गई है। हालांकि, मजदूरों के भविष्य को लेकर समाधान निकालने के लिए बातचीत की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।



