
अजित पवार के हेलीकॉप्टर से जुड़े हालिया क्रैश ने देशभर में विमानन सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। घटना के तुरंत बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय हरकत में आया और अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड्स की व्यापक जांच के आदेश जारी कर दिए। मंत्रालय का मानना है कि जिन हवाई पट्टियों पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल की व्यवस्था सीमित या नहीं है, वहां ऑपरेशन के दौरान जोखिम बढ़ जाता है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ऐसे एयरफील्ड्स पर संचार, मौसम संबंधी अपडेट, रनवे की स्थिति और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली में कई बार कमियां सामने आती रही हैं। यही वजह है कि अब सरकार ने तकनीकी टीमों को मौके पर भेजकर सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने का फैसला लिया है।
इस जांच में उड़ान से पहले की अनुमति प्रक्रिया, पायलट ब्रीफिंग, ग्राउंड स्टाफ की उपलब्धता और नेविगेशनल सहायता जैसे पहलुओं को बारीकी से परखा जाएगा। मंत्रालय यह भी देखेगा कि क्या स्थानीय प्रशासन और एयरफील्ड प्रबंधन नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के तय नियमों का पालन कर रहे थे या नहीं। सूत्रों का कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदार एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में वीआईपी या सामान्य उड़ानों के दौरान यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे शहरों और दूरदराज इलाकों में मौजूद कई अनकंट्रोल्ड एयरस्ट्रिप्स पर आधुनिक उपकरणों की कमी लंबे समय से चिंता का विषय रही है। हालांकि इनका उपयोग क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए जरूरी है, लेकिन सुरक्षा ढांचे को मजबूत किए बिना जोखिम कम नहीं किया जा सकता। इस घटना के बाद मंत्रालय द्वारा शुरू की गई जांच को विमानन क्षेत्र में एक जरूरी और समय पर उठाया गया कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर नई गाइडलाइंस, अतिरिक्त ट्रेनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड जैसे फैसले लिए जा सकते हैं, ताकि देश की हवाई सुरक्षा व्यवस्था और ज्यादा मजबूत बन सके।



