इको-टूरिज्म में निजी निवेश को बढ़ावा, सीएम योगी बोले– वैश्विक स्तर की सुविधाएं हों विकसित

उत्तर प्रदेश में पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार इको-टूरिज्म पर विशेष फोकस कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा है कि प्राकृतिक स्थलों को सुरक्षित रखते हुए वहां विश्व स्तरीय सुविधाओं का विकास किया जाए और इसमें निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उनका मानना है कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए न सिर्फ पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे। प्रदेश में मौजूद वन क्षेत्र, झीलें, नदियां, वेटलैंड और धार्मिक-प्राकृतिक स्थल देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार क्षमता रखते हैं, जरूरत है तो उन्हें व्यवस्थित ढंग से विकसित करने की।
सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इको-टूरिज्म स्थलों पर आधारभूत ढांचा मजबूत किया जाए, लेकिन पर्यावरणीय संतुलन से किसी प्रकार का समझौता न हो। वहां पहुंच मार्ग, स्वच्छता, सुरक्षा, गाइड, ठहरने की बेहतर व्यवस्था, एडवेंचर गतिविधियां और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं विकसित की जाएं। निजी निवेश आने से आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रोफेशनल मैनेजमेंट और बेहतर ब्रांडिंग संभव होगी, जिससे यूपी का पर्यटन नक्शा और मजबूत बनेगा। सरकार की मंशा है कि पर्यटक ज्यादा समय प्रदेश में बिताएं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिले।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इको-टूरिज्म का विकास स्थानीय समुदाय को साथ लेकर किया जाना चाहिए। इससे गांवों में होमस्टे, हस्तशिल्प, स्थानीय खानपान और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। यह मॉडल सतत विकास की अवधारणा को मजबूत करेगा, जहां प्रकृति की रक्षा भी होगी और आय के नए स्रोत भी बनेंगे। प्रदेश सरकार पहले ही कई स्थानों को चिन्हित कर चुकी है, जहां निजी क्षेत्र के सहयोग से बड़े निवेश की संभावनाएं हैं।
योगी सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। यदि योजनाएं तय समय पर धरातल पर उतरती हैं, तो आने वाले वर्षों में यूपी इको-टूरिज्म का बड़ा हब बन सकता है, जहां प्रकृति, रोमांच और आधुनिक सुविधाओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।



