यूपी में 15 किमी लंबा नया लिंक एक्सप्रेसवे, योगी कैबिनेट ने RFP को दी मंजूरी

उत्तर प्रदेश में सड़क अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 15 किलोमीटर लंबे नए लिंक एक्सप्रेसवे के लिए आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) को स्वीकृति दे दी गई है। इस फैसले के बाद परियोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि यह लिंक एक्सप्रेसवे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देगा।
सरकार का फोकस लंबे समय से प्रदेश में बेहतर सड़क नेटवर्क तैयार करने पर रहा है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर और गंगा एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं के बाद अब छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लिंक मार्गों पर ध्यान दिया जा रहा है। यह नया 15 किमी का एक्सप्रेसवे मुख्य मार्गों को आपस में जोड़कर यात्रा समय कम करेगा और परिवहन को अधिक सुगम बनाएगा। खास तौर पर उद्योगों, व्यापार और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को इसका बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और निर्माण एजेंसियों का चयन किया जाएगा। परियोजना पूरी होने पर आसपास के क्षेत्रों में निवेश बढ़ने, नई औद्योगिक इकाइयों के आने और रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है। बेहतर कनेक्टिविटी का असर रियल एस्टेट और स्थानीय कारोबार पर भी दिखाई देगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार उत्तर प्रदेश को देश के सबसे बेहतर कनेक्टेड राज्यों में शामिल करने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है। सरकार की मंशा है कि हर प्रमुख आर्थिक केंद्र तेज और सुरक्षित सड़कों से जुड़ा हो, जिससे माल और यात्रियों की आवाजाही आसान हो सके।
कुल मिलाकर, 15 किलोमीटर के इस लिंक एक्सप्रेसवे को भले ही लंबाई के लिहाज से छोटा माना जाए, लेकिन विकास और कनेक्टिविटी के नजरिए से इसका महत्व काफी बड़ा है। आने वाले समय में यह परियोजना प्रदेश की प्रगति की रफ्तार को और तेज करती हुई नजर आ सकती है।



