स्मार्ट प्रीपेड मीटर: 120 करोड़ की वसूली बिजली बिल में समायोजित करने की मांग

उत्तर प्रदेश में उपभोक्ता परिषद ने हाल ही में स्मार्ट प्रीपेड मीटर से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव पेश किया है। परिषद ने राज्य विद्युत विभाग से मांग की है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर हुई लगभग 120 करोड़ रुपये की वसूली को बिजली बिल में समायोजित किया जाए। इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं पर अचानक आर्थिक बोझ को कम करना और बिजली उपयोग को पारदर्शी व संतुलित तरीके से प्रबंधित करना है।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर तकनीक का उद्देश्य बिजली उपभोग को सटीक और पारदर्शी तरीके से मापना है। हालांकि, कई मामलों में उपभोक्ताओं को अतिरेक वसूली का सामना करना पड़ा है। उपभोक्ता परिषद का कहना है कि यदि यह राशि सीधे बिल में समायोजित की जाती है, तो न केवल उपभोक्ताओं की परेशानी कम होगी बल्कि बिजली वितरण प्रणाली में विश्वास भी बढ़ेगा। परिषद ने यह भी सुझाव दिया कि विभाग को नियमित ऑडिट और निगरानी के जरिए मीटर रीडिंग में किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्मार्ट मीटर तकनीक में समय-समय पर तकनीकी खामियों या गणना में त्रुटियों के कारण कभी-कभी उपभोक्ताओं से अधिक शुल्क वसूला जाता है। ऐसे में बिल में समायोजन करने से यह समस्या लंबे समय तक हल की जा सकती है। इसके अलावा, यह कदम राज्य सरकार की उपभोक्ता हितैषी नीतियों को मजबूत करेगा और ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद करेगा।
उपभोक्ता परिषद ने विभाग से यह भी अनुरोध किया है कि भविष्य में मीटर इंस्टॉलेशन और वसूली प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जाए। इसके लिए डिजिटल रीडिंग सिस्टम, मोबाइल एप और ऑनलाइन बिलिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा सकता है। इससे उपभोक्ता अपनी खपत और वसूली पर नियंत्रण रख सकते हैं और किसी भी अनियमितता का तुरंत पता चला जा सकता है।
राज्य में स्मार्ट मीटर योजना का लक्ष्य बिजली बचत, उचित वितरण और उपभोक्ताओं को रियल-टाइम डेटा उपलब्ध कराना है। यदि परिषद की मांग को लागू किया जाता है, तो यह कदम उपभोक्ताओं के लिए राहत और विश्वास दोनों बढ़ाने वाला साबित होगा। इसके साथ ही बिजली क्षेत्र में संतुलन और पारदर्शिता को भी मजबूती मिलेगी।



