रोजगार का नया इंजन बनेगा MSME; बजट बढ़ा, युवाओं के लिए स्वरोजगार के बड़े मौके

उत्तर प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी MSME सेक्टर को रोजगार सृजन का सबसे बड़ा आधार बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पेश किए गए ताजा बजट में इस क्षेत्र के लिए 19 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। इसका सीधा उद्देश्य युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनाना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजनाबद्ध तरीके से हर साल कम से कम एक लाख नए उद्यमी तैयार किए जाएंगे, जिन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार उपलब्धता और तकनीकी सहयोग एक साथ मिलेगा।
राज्य में पहले से मौजूद पारंपरिक उद्योग—जैसे हस्तशिल्प, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, लकड़ी और धातु आधारित इकाइयों—को आधुनिक जरूरतों के मुताबिक अपग्रेड करने की तैयारी है। नई नीति के तहत क्लस्टर आधारित विकास, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, आसान लोन और डिजिटल मार्केटिंग पर खास जोर रहेगा। इससे छोटे कारोबारियों की लागत घटेगी और उनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि MSME जितना मजबूत होगा, ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में उतनी तेजी से आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
युवाओं को उद्यमिता की ओर आकर्षित करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को विश्वविद्यालयों, आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों से जोड़ा जाएगा। स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की रणनीति तैयार है। ‘मेक इन यूपी’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों का लाभ भी MSME इकाइयों को मिलेगा। वित्तीय संस्थानों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर ऋण वितरण को सरल बनाने की बात कही गई है, ताकि पूंजी की कमी किसी भी इच्छुक युवा के रास्ते में बाधा न बने।
सरकार को उम्मीद है कि बजट में की गई यह वृद्धि निवेश, उत्पादन और निर्यात—तीनों मोर्चों पर सकारात्मक असर डालेगी। यदि हर साल एक लाख नए उद्यमी तैयार होते हैं, तो कुछ वर्षों में यह संख्या लाखों रोजगार अवसरों में बदल सकती है। इससे पलायन कम होगा और स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता मजबूत होगी। कुल मिलाकर MSME को विकास का इंजन बनाकर उत्तर प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी और अधिक बढ़ाने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ाता नजर आ रहा है।



