भारत में बढ़ रहा फैटी लिवर का खतरा, रिसर्च में चौंकाने वाली वजह

भारत में फैटी लिवर की समस्या तेजी से आम होती जा रही है और हालिया शोधों ने इसके पीछे की बड़ी वजहों पर गंभीर संकेत दिए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान, बढ़ता मोटापा और शारीरिक गतिविधियों में कमी इस बीमारी को बढ़ावा दे रही है। डॉक्टरों का कहना है कि पहले यह समस्या अधिकतर 40 वर्ष से ऊपर के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब युवा वर्ग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है। रिसर्च में सामने आया है कि लंबे समय तक जंक फूड, मीठे पेय, अधिक तेल-मसाले वाले भोजन और देर रात खाने की आदत लिवर में चर्बी जमा होने की प्रक्रिया को तेज कर देती है। इसके अलावा घंटों बैठकर काम करने की दिनचर्या, तनाव और नींद की कमी भी जोखिम को बढ़ाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि फैटी लिवर शुरुआती चरण में अक्सर बिना लक्षण के रहता है, जिस कारण लोगों को समय रहते पता नहीं चल पाता। कई मामलों में थकान, पेट के ऊपरी हिस्से में भारीपन या हल्का दर्द जैसे संकेत मिलते हैं, लेकिन इन्हें सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह स्थिति लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस या सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों में बदल सकती है। चिकित्सकों का सुझाव है कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और शराब से दूरी बनाकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही, जिन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, उन्हें नियमित जांच कराते रहना चाहिए।
रिसर्च यह भी बताती है कि शहरी आबादी में प्रोसेस्ड फूड की बढ़ती खपत और फास्ट-फूड संस्कृति ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। डॉक्टरों का मानना है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। समय-समय पर हेल्थ चेकअप और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर फैटी लिवर जैसी बीमारी को रोका जा सकता है। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे लक्षण दिखने का इंतजार न करें, बल्कि अपने खानपान और दिनचर्या में अभी से सुधार करें, ताकि भविष्य में होने वाली जटिलताओं से बचा जा सके।



