
डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल जहां लोगों की जिंदगी को आसान बना रहा है, वहीं इसका लापरवाही से उपयोग बड़े सुरक्षा खतरे भी पैदा कर सकता है। हाल ही में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक चीनी अधिकारी द्वारा लोकप्रिय एआई चैटबॉट ChatGPT को निजी डायरी की तरह इस्तेमाल करने की बात उजागर हुई है। बताया जा रहा है कि अधिकारी अपने आधिकारिक कामकाज, आंतरिक बैठकों की चर्चाएं, नीतिगत रणनीतियां और निजी विचार तक इस प्लेटफॉर्म पर दर्ज कर रहा था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने डेटा लीक से जुड़े कुछ संकेत पकड़े। जांच में पता चला कि संबंधित अधिकारी नियमित रूप से संवेदनशील जानकारियां एआई प्लेटफॉर्म पर लिख रहा था, मानो वह कोई निजी नोटबुक हो। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई टूल्स उपयोगकर्ताओं की सुविधा के लिए बनाए गए हैं, लेकिन गोपनीय सरकारी सूचनाओं को इस तरह साझा करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
इस खुलासे के बाद चीन की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि अगर उच्च पदों पर बैठे अधिकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म की संवेदनशीलता को नहीं समझेंगे, तो डेटा सुरक्षा की नीति कितनी भी मजबूत क्यों न हो, जोखिम बना रहेगा। वहीं टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि किसी भी एआई प्लेटफॉर्म को “डायरी” की तरह उपयोग करना, खासकर सरकारी अधिकारियों द्वारा, बेहद असावधानी भरा कदम है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना ने बहस छेड़ दी है। कई देशों ने पहले ही सरकारी कर्मचारियों के लिए एआई टूल्स के उपयोग को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि तकनीक जितनी शक्तिशाली होती है, उसका जिम्मेदार उपयोग उतना ही जरूरी हो जाता है। फिलहाल इस पूरे प्रकरण पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन इतना तय है कि इस खुलासे ने डिजिटल सुरक्षा और एआई के इस्तेमाल को लेकर वैश्विक बहस को और तेज कर दिया है।



