
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अरावली पर्वत श्रृंखला में अवैध खनन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि पर्यावरण और जैव विविधता की सुरक्षा के लिए खनन गतिविधियों को तत्काल बंद किया जाए। अरावली की पहाड़ियाँ न केवल दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए वायु और जल संरक्षण का महत्वपूर्ण स्रोत हैं, बल्कि ये प्राकृतिक पारिस्थितिकी और स्थानीय जीवन के लिए भी अनिवार्य हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि लगातार हो रहे अवैध खनन से न केवल पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और आसपास के गांवों के जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय और राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे खनन पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाएँ और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। अदालत ने कहा कि “हम कहते हैं खनन बंद कर दो और आप अभी भी गतिविधियाँ जारी रखते हैं,” जो खतरनाक संकेत है। विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली की हरी-भरी पहाड़ियों को बचाना न केवल आज की पीढ़ी के लिए बल्कि आने वाले समय के लिए भी अनिवार्य है।
अवैध खनन के कारण मिट्टी कटाव, भू-स्खलन और जल स्रोतों में कमी जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। इसके अलावा, जंगल और वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास भी खतरे में है। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष निगरानी कमेटी बनाने का निर्देश दिया है, जो खनन की गतिविधियों पर नियमित नजर रखे और नियमों के उल्लंघन पर तुरंत रिपोर्ट करे। पर्यावरणविदों का मानना है कि अगर इस समय कार्रवाई नहीं हुई तो अरावली की पारिस्थितिकी पूरी तरह से असंतुलित हो सकती है। कोर्ट के इस कड़े रुख से साफ संदेश गया है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और नियमों का पालन अब किसी भी कीमत पर अनदेखा नहीं किया जा सकता।



