घुटनों के दर्द की असली वजह कहीं आपका बढ़ता मोटापा तो नहीं? एक्सपर्ट समझा रहे हैं साइंस

आजकल घुटनों के दर्द की समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि युवाओं में भी यह परेशानी तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे एक बड़ी वजह बढ़ता हुआ मोटापा है। दरअसल, हमारे शरीर का पूरा वजन पैरों और खासकर घुटनों के जोड़ों पर पड़ता है। जब शरीर का वजन सामान्य से अधिक हो जाता है तो घुटनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे धीरे-धीरे जोड़ों की संरचना प्रभावित होने लगती है। डॉक्टर बताते हैं कि चलने, सीढ़ियां चढ़ने या दौड़ने जैसी गतिविधियों के दौरान घुटनों पर शरीर के वजन का कई गुना दबाव पड़ता है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति का वजन जरूरत से ज्यादा है तो यह दबाव और बढ़ जाता है, जिससे कार्टिलेज यानी घुटनों के कुशन जैसी परत जल्दी घिसने लगती है। यही कारण है कि मोटापे से जूझ रहे लोगों में घुटनों के दर्द, सूजन और जकड़न की समस्या अधिक देखने को मिलती है। इसके अलावा मोटापा शरीर में सूजन पैदा करने वाले केमिकल्स को भी बढ़ा देता है, जो जोड़ों के दर्द को और गंभीर बना सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते वजन को नियंत्रित न किया जाए तो आगे चलकर ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। अच्छी बात यह है कि वजन कम करने से घुटनों पर पड़ने वाला दबाव काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाने से न केवल शरीर का वजन नियंत्रित रहता है बल्कि जोड़ों की सेहत भी बेहतर होती है। डॉक्टर अक्सर तैराकी, साइक्लिंग और हल्की वॉक जैसे लो-इम्पैक्ट एक्सरसाइज की सलाह देते हैं, जिससे घुटनों पर ज्यादा दबाव भी नहीं पड़ता और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। साथ ही लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से बचना और सही पोस्चर बनाए रखना भी जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग अपने वजन पर नियंत्रण रखें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं तो घुटनों के दर्द की समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। इसलिए घुटनों में बार-बार दर्द होने पर केवल दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय अपने वजन और जीवनशैली पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है।



