


देश की शिक्षा व्यवस्था और छात्रों पर बढ़ते दबाव को लेकर Madras High Court ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि कई माता-पिता अपने बच्चों को केवल मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे पेशों की ओर धकेल देते हैं, जिससे अन्य क्षेत्रों में उनकी प्रतिभा विकसित होने का मौका नहीं मिल पाता।
अदालत का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल कुछ सीमित पेशों तक सीमित नहीं होना चाहिए। छात्रों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि समाज में सफलता को केवल डॉक्टर या इंजीनियर बनने से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। कला, खेल, शोध और अन्य पेशे भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं और इन क्षेत्रों में भी युवाओं को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।