हनुमान जी और मकरध्वज का रहस्य

हिंदू धर्म में Hanuman को ब्रह्मचारी माना जाता है, यानी उन्होंने विवाह नहीं किया था। लेकिन पौराणिक कथाओं में उनके पुत्र Makardhwaja का उल्लेख मिलता है, जो एक रहस्यमयी घटना से जुड़ा हुआ है।
कथा के अनुसार, जब हनुमान जी लंका दहन के बाद समुद्र में अपनी जलती पूंछ को बुझाने के लिए गए, तब उनके शरीर से निकली एक पसीने की बूंद समुद्र में गिर गई। उस बूंद को एक मछली ने निगल लिया, जिससे बाद में मकरध्वज का जन्म हुआ।
मकरध्वज को बाद में पाताल लोक के राजा अहिरावण ने पाला और बड़ा किया। जब भगवान राम और लक्ष्मण को बचाने के लिए हनुमान जी पाताल लोक पहुंचे, तब उनका सामना मकरध्वज से हुआ। युद्ध के बाद यह रहस्य सामने आया कि मकरध्वज उन्हीं के पुत्र हैं।
इस कथा से यह स्पष्ट होता है कि हनुमान जी ने विवाह नहीं किया था, लेकिन एक दिव्य और अनोखी घटना के कारण मकरध्वज का जन्म हुआ। यह कहानी भारतीय पौराणिक परंपराओं की गहराई और रहस्यमयता को दर्शाती है।



