ईरान को कितना साथ देगा चीन?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच चीन की रणनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े हो गए हैं। ईरान के साथ उसके गहरे संबंधों और क्षेत्र में करीब 270 अरब डॉलर के निवेश को लेकर अब नई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में संघर्ष और अस्थिरता बढ़ती है, तो चीन की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों पर सीधा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping की कूटनीतिक रणनीति पर भी दबाव बढ़ता दिख रहा है।
चीन लंबे समय से ईरान के साथ ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग को मजबूत करता रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में उसे अपने निवेश और राजनीतिक संतुलन दोनों को साधना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले समय में चीन की ईरान नीति इस बात पर निर्भर करेगी कि मिडिल ईस्ट में तनाव किस दिशा में जाता है और वैश्विक शक्तियां किस तरह हस्तक्षेप करती हैं।



