


Supreme Court of India में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने संविधान को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि “संविधान कुछ खास लोगों की जागीर नहीं है।” उनकी इस टिप्पणी को न्यायपालिका और लोकतांत्रिक मूल्यों के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसी बीच कई पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने CJI को पत्र लिखकर पर्यावरण संरक्षण और विकास परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई है। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि पर्यावरण से जुड़े मामलों में संवैधानिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों का संतुलन बनाए रखा जाए।
कानूनी और सामाजिक हलकों में CJI की टिप्पणी पर व्यापक चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि संविधान की व्याख्या और नागरिक अधिकारों की रक्षा में न्यायपालिका की भूमिका बेहद अहम है। वहीं पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर अदालतों की सक्रियता को भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।