
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने सेक्शन 301 जांच के बाद भारत, चीन समेत 54 देशों से आने वाले आयात पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिका का आरोप है कि इन देशों ने जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं।
प्रस्ताव के अनुसार, जिन देशों ने जबरन श्रम से जुड़े आयात पर पूर्ण या आंशिक नियंत्रण व्यवस्था लागू की है, उन पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। वहीं भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और कई अन्य देशों को 12.5% वाले उच्च श्रेणी के शुल्क में रखा गया है।
भारत ने अमेरिकी आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। नई दिल्ली का कहना है कि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और इसे चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभी केवल प्रस्ताव है, अंतिम फैसला नहीं। USTR ने सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी हैं और जुलाई में सुनवाई प्रस्तावित है। इसके बाद ही यह तय होगा कि शुल्क वास्तव में लागू किए जाएंगे या नहीं।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो भारतीय निर्यातकों, विशेषकर वस्त्र, इंजीनियरिंग उत्पाद, रसायन, मशीनरी और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि कई संवेदनशील उत्पादों, जैसे कुछ दवाइयों, ऊर्जा उत्पादों और अन्य रणनीतिक वस्तुओं को छूट देने पर भी विचार किया गया है।
इस कदम को कई विश्लेषक अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की व्यापक व्यापार रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है, इसलिए आने वाले हफ्तों में कूटनीतिक वार्ताएं और महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
कुल मिलाकर, फिलहाल यह एक प्रस्तावित कार्रवाई है, लेकिन यदि इसे लागू किया गया तो यह वैश्विक व्यापार तनाव को बढ़ा सकती है और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में नया मोड़ ला सकती है।



