अधिक मास 2026: भांजा-भांजी की सेवा क्यों मानी जाती है विशेष? जानिए धार्मिक मान्यता

हिंदू धर्म में अधिक मास, जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, आध्यात्मिक साधना, दान-पुण्य और सेवा के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में किए गए शुभ कार्यों का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है। इसी कारण विभिन्न ग्रंथों और लोक परंपराओं में भांजा-भांजी के सम्मान और सेवा को भी विशेष महत्व दिया गया है।
लोकमान्यताओं में कहा जाता है कि भांजा और भांजी भगवान विष्णु तथा मातृ पक्ष के आशीर्वाद के प्रतीक माने जाते हैं। कुछ क्षेत्रों में यह मान्यता प्रचलित है कि एक भांजा या भांजी का सम्मान और सत्कार अनेक ब्राह्मणों की सेवा के समान पुण्य प्रदान कर सकता है। हालांकि यह धार्मिक आस्था और स्थानीय परंपराओं पर आधारित मान्यता है, जिसके अलग-अलग क्षेत्रों में अलग स्वरूप देखने को मिलते हैं।
अधिक मास के दौरान लोग अपने भांजे-भांजियों को भोजन कराना, वस्त्र भेंट करना, उपहार देना और उनका आशीर्वाद लेना शुभ मानते हैं। माना जाता है कि इससे परिवार में सुख-समृद्धि, सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार अधिक मास का मूल संदेश सेवा, त्याग, दान और आत्मचिंतन है। इसलिए इस अवधि में केवल कर्मकांड ही नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता, परिवारजनों का सम्मान और सदाचारपूर्ण जीवन भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है।
अधिक मास 2026 के अवसर पर श्रद्धालु व्रत, पूजा, कथा-श्रवण, दान और सेवा कार्यों के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास करेंगे। भांजा-भांजी से जुड़ी यह परंपरा भी भारतीय पारिवारिक और सांस्कृतिक मूल्यों की एक अनूठी झलक प्रस्तुत करती है।



