मानसून में बढ़ सकता है हीट स्ट्रेस, तापमान-नमी का खतरनाक मेल बन सकता है जानलेवा

मानसून के दौरान मौसम अपेक्षाकृत ठंडा महसूस हो सकता है, लेकिन बढ़ी हुई आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) और गर्म तापमान का मेल शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी परिस्थितियों में हीट स्ट्रेस का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि शरीर को पसीने के माध्यम से खुद को ठंडा रखने में कठिनाई होती है।
जब वातावरण में नमी अधिक होती है, तो पसीना जल्दी नहीं सूखता। इससे शरीर की प्राकृतिक शीतलन प्रक्रिया प्रभावित होती है और शरीर का तापमान बढ़ सकता है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और हृदय, किडनी या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोग हीट स्ट्रेस के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। गंभीर मामलों में हीट एक्सॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी स्थितियां भी विकसित हो सकती हैं, जिनमें तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता पड़ती है।
हीट स्ट्रेस के प्रमुख लक्षण
- अत्यधिक पसीना आना
- चक्कर या कमजोरी महसूस होना
- तेज धड़कन
- सिरदर्द
- मांसपेशियों में ऐंठन
- मतली या उल्टी
- भ्रम या बेहोशी जैसी स्थिति
बचाव के उपाय
- पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ का सेवन करें।
- बहुत अधिक उमस वाले समय में भारी शारीरिक गतिविधियों से बचें।
- हल्के और ढीले कपड़े पहनें।
- घर और कार्यस्थल को हवादार रखें।
- शरीर में कमजोरी या चक्कर महसूस होने पर तुरंत आराम करें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून में केवल संक्रामक बीमारियों ही नहीं, बल्कि तापमान और आर्द्रता से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है। समय रहते सावधानी बरतकर हीट स्ट्रेस और उससे जुड़ी जटिलताओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
नोट: यदि किसी व्यक्ति में गंभीर लक्षण दिखाई दें या बेहोशी, भ्रम अथवा अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।



