यूपी में 2000 मेगावाट घटी बिजली की मांग, बढ़े फॉल्ट; निगम ने 15 यूनिटों को दिया रिजर्व शटडाउन

उत्तर प्रदेश में मौसम के बदले मिजाज का असर बिजली खपत पर भी दिखाई देने लगा है। बारिश और तापमान में गिरावट के कारण प्रदेश में बिजली की मांग लगभग 2000 मेगावाट तक कम हो गई है। मांग में कमी आने से बिजली उत्पादन और वितरण व्यवस्था में भी बदलाव किए गए हैं।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी जानकारी के अनुसार बिजली की मांग घटने के साथ-साथ कई स्थानों पर तकनीकी फॉल्ट की घटनाओं में भी वृद्धि दर्ज की गई है। तेज हवाओं, बारिश और नमी के कारण वितरण तंत्र पर अतिरिक्त दबाव बना है, जिससे स्थानीय स्तर पर आपूर्ति प्रभावित होने की शिकायतें सामने आई हैं।
बिजली निगम ने मांग में कमी को देखते हुए 15 उत्पादन इकाइयों को रिजर्व शटडाउन पर भेजने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य आवश्यकता के अनुसार उत्पादन संतुलन बनाए रखना और अनावश्यक परिचालन लागत को कम करना है।
ऊर्जा विभाग का कहना है कि प्रदेश में बिजली की उपलब्धता पर्याप्त है और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। फॉल्ट की स्थिति में मरम्मत कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में बिजली की मांग अपने उच्च स्तर पर पहुंच जाती है, जबकि मानसून और तापमान में गिरावट के साथ खपत स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है। ऐसे समय में उत्पादन इकाइयों का संचालन मांग के अनुरूप समायोजित किया जाता है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि मौसम में बदलाव के साथ बिजली मांग का यह उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि वितरण तंत्र को मजबूत बनाए रखना आवश्यक है, ताकि खराब मौसम के दौरान भी उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा मिल सके।



