
केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर नई एक्सपोर्ट ड्यूटी लागू कर दी है। नई अधिसूचना के अनुसार डीजल पर ₹14 प्रति लीटर और ATF पर ₹12.5 प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी प्रभावी हो गई है। यह नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है, जिससे पेट्रोलियम और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों की नजरें बाजार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सपोर्ट ड्यूटी में बदलाव का उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन उपलब्धता बनाए रखना और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के प्रभाव को संतुलित करना हो सकता है। ऐसी नीतियां आमतौर पर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों, घरेलू मांग और ऊर्जा सुरक्षा जैसे कारकों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं।
ATF पर ड्यूटी बढ़ने का असर विमानन क्षेत्र पर भी पड़ सकता है, क्योंकि यह एयरलाइंस के परिचालन खर्च का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। वहीं डीजल पर लागू नई दरों का प्रभाव रिफाइनिंग कंपनियों और निर्यात कारोबार से जुड़े हितधारकों पर देखने को मिल सकता है। हालांकि वास्तविक असर बाजार की परिस्थितियों और वैश्विक मांग पर निर्भर करेगा।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कर और शुल्क नीतियां सरकारी राजस्व, घरेलू आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नई दरों के लागू होने के बाद उद्योग जगत और बाजार विशेषज्ञ इसके प्रभाव का आकलन कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इसके आर्थिक और कारोबारी प्रभाव अधिक स्पष्ट रूप से सामने आ सकते हैं।



