China Dam: ब्रह्मपुत्र पर दुनिया का सबसे बड़ा बांध बना रहा चीन, भारत के लिए क्यों माना जा रहा ‘वॉटर बम’?

चीन तिब्बत क्षेत्र में Yarlung Tsangpo (भारत में ब्रह्मपुत्र) पर एक विशाल जलविद्युत परियोजना विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। यह परियोजना पूरी होने पर दुनिया की सबसे बड़ी हाइड्रोपावर परियोजनाओं में शामिल हो सकती है। प्रस्तावित बांध तिब्बत के उस हिस्से में बनाया जाना है जहां नदी गहरी घाटियों से होकर बहती है और भारी जल प्रवाह के कारण बिजली उत्पादन की अपार क्षमता रखती है।
क्यों बढ़ी भारत की चिंता?
ब्रह्मपुत्र भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर अरुणाचल प्रदेश और असम, के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। चीन नदी के ऊपरी हिस्से (अपस्ट्रीम) में स्थित है, जबकि भारत और बांग्लादेश निचले हिस्से (डाउनस्ट्रीम) में हैं। इसी कारण किसी भी बड़े जल परियोजना का असर नीचे बहने वाले देशों पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भविष्य में नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने, जल संग्रहण बढ़ाने या जल मोड़ने जैसी गतिविधियां होती हैं, तो इसका प्रभाव जल उपलब्धता, कृषि, पारिस्थितिकी और बाढ़ प्रबंधन पर पड़ सकता है। इसी वजह से कुछ रणनीतिक विश्लेषक इसे “वॉटर बम” जैसी संज्ञा देते हैं, हालांकि यह अधिकतर एक राजनीतिक और सामरिक अभिव्यक्ति है।
क्या चीन नदी का रास्ता मोड़ सकता है?
कई वर्षों से यह चर्चा होती रही है कि चीन यारलुंग त्सांगपो के जल को अपने शुष्क उत्तरी क्षेत्रों की ओर मोड़ने की दीर्घकालिक योजना बना सकता है। हालांकि चीन ने आधिकारिक तौर पर बड़े पैमाने पर नदी का मार्ग बदलने की किसी योजना की पुष्टि नहीं की है। चीन का कहना है कि परियोजना मुख्य रूप से जलविद्युत उत्पादन के लिए है और इससे निचले देशों के हितों को नुकसान नहीं होगा।
पर्यावरणीय चिंताएं
- हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय रूप से संवेदनशील है।
- बड़े बांधों से स्थानीय पारिस्थितिकी प्रभावित हो सकती है।
- जैव विविधता और नदी तंत्र पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
- अचानक जल छोड़ने की स्थिति में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
भारत की रणनीति
भारत लंबे समय से चीन के साथ हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करने और नदी प्रबंधन पर संवाद की आवश्यकता पर जोर देता रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पारदर्शिता, डेटा साझाकरण और क्षेत्रीय सहयोग इस तरह की चिंताओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
निष्कर्ष:
ब्रह्मपुत्र पर चीन की मेगा परियोजना केवल एक ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की जल सुरक्षा, पर्यावरण और भू-राजनीति से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुकी है। भारत की चिंता मुख्य रूप से नदी के प्रवाह, पारिस्थितिकी और भविष्य की जल सुरक्षा को लेकर है, जबकि चीन इसे विकास और ऊर्जा उत्पादन की परियोजना के रूप में पेश करता है।



