
शाहिद कपूर, Kriti Sanon और Rashmika Mandanna स्टारर ‘कॉकटेल 2’ बड़े सितारों, शानदार लोकेशंस और रोमांटिक ड्रामा के वादे के साथ सिनेमाघरों में पहुंची, लेकिन फिल्म दर्शकों को वैसा भावनात्मक अनुभव देने में संघर्ष करती दिखाई देती है जैसा पहली ‘कॉकटेल’ ने दिया था। सिसिली की मनमोहक वादियां और भव्य सिनेमैटोग्राफी फिल्म को विजुअल स्तर पर आकर्षक बनाती हैं, लेकिन कहानी और किरदारों की गहराई कई जगह कमजोर पड़ती नजर आती है।
फिल्म का सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण पक्ष इसकी पटकथा है। जहां पहली ‘कॉकटेल’ में रिश्तों की जटिलता, दोस्ती और प्रेम के बीच का संघर्ष दर्शकों को बांधे रखता था, वहीं सीक्वल में कई घटनाक्रम पूर्वानुमानित लगते हैं। शाहिद कपूर अपने किरदार में प्रभाव छोड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन कहानी उन्हें उतना मजबूत मंच नहीं दे पाती। कृति सेनन और रश्मिका मंदाना ने भी अपने-अपने किरदारों को ईमानदारी से निभाया है, हालांकि उनके पात्रों का विकास अपेक्षाकृत सीमित महसूस होता है।
संगीत और लोकेशन फिल्म की प्रमुख ताकत हैं, लेकिन केवल खूबसूरत दृश्य किसी रोमांटिक ड्रामा को यादगार नहीं बना सकते। भावनात्मक दृश्यों में वह गहराई और प्रभाव नहीं दिखता, जिसकी दर्शक ऐसी फिल्म से अपेक्षा करते हैं। कुल मिलाकर, ‘कॉकटेल 2’ मनोरंजन तो करती है, लेकिन पहली फिल्म की तरह लंबे समय तक याद रहने वाला प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं हो पाती। यही कारण है कि सिसिली की खूबसूरती के बावजूद इस ‘कॉकटेल’ में वह नशा महसूस नहीं होता, जिसकी उम्मीद दर्शकों ने की थी।



