
संविधान हत्या दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर जमकर निशाना साधा। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की रक्षा के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। उन्होंने आपातकाल का जिक्र करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय बताया और कहा कि उस दौर की घटनाओं को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
मुख्यमंत्री योगी ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने उन लोगों से हाथ मिला लिया है, जो कभी सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के विरोधी रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता और राजनीतिक स्वार्थ के लिए सिद्धांतों से समझौता किया जा रहा है। योगी ने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और समय आने पर उसका जवाब भी देगी।
उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से इतिहास के उन अध्यायों को याद रखने का आह्वान किया, जब लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि संविधान की भावना के अनुरूप शासन चलाना और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है। वहीं, सपा की ओर से भी मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है।



