
केंद्र सरकार ने जन विश्वास एक्ट 2026 के तहत फार्मास्यूटिकल और फूड सेक्टर से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य कारोबार करने की प्रक्रिया को सरल बनाना, अनावश्यक अनुपालन (Compliance) का बोझ कम करना और ईमानदार कारोबारियों को राहत प्रदान करना है। इसके साथ ही नियामकीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवसाय-अनुकूल बनाने पर भी जोर दिया गया है।
नए प्रावधानों के तहत कई प्रक्रियाओं को डिजिटल और समयबद्ध बनाया गया है। साथ ही कुछ मामलों में छोटे या तकनीकी उल्लंघनों के लिए आपराधिक कार्रवाई के बजाय प्रशासनिक या आर्थिक दंड की व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे उद्योगों को बेहतर कारोबारी माहौल मिलेगा और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
फार्मा और फूड सेक्टर से जुड़े उद्योग संगठनों का कहना है कि इन बदलावों से लाइसेंसिंग, निरीक्षण और नियामकीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी तथा अनुपालन की लागत कम होगी। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा, दवाओं और खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मानकों में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, जन विश्वास एक्ट 2026 भारत में Ease of Doing Business को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे उद्योगों को नियामकीय स्पष्टता मिलेगी, जबकि जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।



