पुतिन का नया यूरेशियन प्लान

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लंबे समय से ‘ग्रेटर यूरेशियन पार्टनरशिप’ (Greater Eurasian Partnership) की अवधारणा को आगे बढ़ा रहे हैं। इसका उद्देश्य यूरेशिया क्षेत्र में आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना है। हाल के घटनाक्रमों के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या रूस इस पहल के जरिए अपनी प्राथमिकताओं को BRICS से आगे बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की यह रणनीति कई क्षेत्रीय संगठनों और साझेदार देशों—जैसे यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU), शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और अन्य एशियाई देशों—के साथ व्यापक सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित है। इस प्रक्रिया में चीन की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। वहीं पाकिस्तान के साथ भी रूस ने हाल के वर्षों में रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में सीमित लेकिन बढ़ते संपर्क बनाए हैं।
हालांकि, इसे भारत को किनारे करने की रणनीति कहना अभी जल्दबाजी होगी। भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, परमाणु सहयोग और कूटनीतिक संबंध अब भी मजबूत माने जाते हैं। भारत BRICS, SCO और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर रूस का महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है।
भू-राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, रूस वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में अपने साझेदारों का दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि वह भारत से दूरी बना रहा है, बल्कि वह समानांतर रूप से कई रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की नीति अपना रहा है।
अस्वीकरण: यह विश्लेषण सार्वजनिक बयानों, भू-राजनीतिक अध्ययनों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। अंतरराष्ट्रीय संबंध समय के साथ बदलते रहते हैं और विभिन्न विशेषज्ञों की राय अलग हो सकती है।



