फ्रांस की गर्मी पर अमेरिका को क्यों ठहराया जिम्मेदार?

यूरोप में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच पेरिस की डिप्टी मेयर के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि फ्रांस में जानलेवा हीटवेव और बढ़ते तापमान के पीछे अमेरिका की जलवायु नीतियां भी एक बड़ी वजह हैं। उनका आरोप है कि दुनिया के सबसे बड़े ऐतिहासिक कार्बन उत्सर्जकों में शामिल अमेरिका ने लंबे समय तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए पर्याप्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए। इसके परिणामस्वरूप ग्लोबल वार्मिंग तेज हुई और आज पूरी दुनिया, खासकर यूरोप, अत्यधिक गर्मी जैसी चरम मौसमी घटनाओं का सामना कर रही है।
डिप्टी मेयर का कहना है कि जलवायु परिवर्तन किसी एक देश की समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक संकट है, इसलिए सभी बड़े औद्योगिक देशों को उत्सर्जन में कटौती और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कार्रवाई करनी होगी। हालांकि, अमेरिका का पक्ष यह रहा है कि वह हाल के वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन में कमी और जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कई कदम उठा रहा है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि मौजूदा हीटवेव के लिए किसी एक देश को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन दशकों से वैश्विक स्तर पर बढ़ते ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन ने जलवायु परिवर्तन को गंभीर बनाया है, जिससे यूरोप सहित दुनिया के कई हिस्सों में अत्यधिक गर्मी, सूखा और अन्य चरम मौसम संबंधी घटनाएं अधिक बार देखने को मिल रही हैं।



