आगरा-ग्रेटर नोएडा की बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट की मांग

आगरा और ग्रेटर नोएडा की बिजली वितरण कंपनियों को लेकर एक समिति ने CAG ऑडिट कराने की मांग की है। समिति का दावा है कि बिजली निगम कम दरों पर बिजली बेच रहा है, जिससे राजस्व और वितरण व्यवस्था से जुड़े कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
समिति का कहना है कि ऑडिट के माध्यम से बिजली खरीद, वितरण और मूल्य निर्धारण की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका मानना है कि इससे वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता है तो उसका पता चल सकेगा।
हालांकि, समिति का यह दावा संबंधित अधिकारियों द्वारा सत्यापित होना बाकी है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच या ऑडिट की आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
समिति का कहना है कि बिजली खरीद और उपभोक्ताओं को आपूर्ति के बीच मूल्य अंतर तथा वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। उनका तर्क है कि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बिजली की लागत, सब्सिडी और टैरिफ निर्धारण की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप है या नहीं।
समिति ने यह भी मांग की है कि यदि ऑडिट में किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि स्वतंत्र ऑडिट से बिजली वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ सकती है। हालांकि, समिति के दावों की पुष्टि और किसी भी निष्कर्ष के लिए आधिकारिक जांच या CAG की रिपोर्ट का इंतजार करना आवश्यक होगा।



