लखनऊ में ‘मिनी जामताड़ा’ का भंडाफोड़, अमेरिकी नागरिकों से 200 करोड़ की साइबर ठगी; 7 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर कथित तौर पर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर करीब 200 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
जांच के अनुसार, आरोपी खुद को सरकारी एजेंसियों या कानून प्रवर्तन अधिकारियों का प्रतिनिधि बताकर पीड़ितों को डराते थे। इसके बाद उन्हें कथित कानूनी कार्रवाई या गिरफ्तारी का भय दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था। इस तरह की धोखाधड़ी को आमतौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम कहा जाता है।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। इनकी जांच के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों और वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है।
‘मिनी जामताड़ा’ शब्द का इस्तेमाल ऐसे संगठित साइबर ठगी नेटवर्क के लिए किया जाता है, जो सुनियोजित तरीके से बड़ी संख्या में लोगों को निशाना बनाते हैं। हालांकि, किसी भी शहर या क्षेत्र की तुलना केवल जांच में सामने आए आरोपों के संदर्भ में ही की जाती है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती और न ही तत्काल पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश देती है। ऐसे किसी भी कॉल पर घबराने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए और संदिग्ध मामलों की सूचना साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस को देनी चाहिए।
मामले की जांच जारी है। आरोपों की पुष्टि अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।



