एमजे अकबर के बाद धर्मेंद्र प्रधान, 8 साल में दूसरा विवादित इस्तीफा

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद साल 2018 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर के इस्तीफे की यादें फिर ताजा हो गई हैं। पिछले आठ वर्षों में यह दूसरा मौका है जब किसी केंद्रीय मंत्री का पद विवाद के बीच छोड़ना राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना है।
2018 में एमजे अकबर ने यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उस समय देश में चले #MeToo अभियान के दौरान कई महिलाओं ने उन पर आरोप लगाए थे, जिसके बाद उन्होंने अपने पद से हटने का फैसला किया था।
अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि राजनीतिक पदों पर बैठे नेताओं के लिए जनभावना, जवाबदेही और नैतिक जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों में पद छोड़ने का फैसला चर्चा का विषय बना।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मंत्रियों के इस्तीफे केवल व्यक्तिगत फैसले नहीं होते, बल्कि सरकार की छवि, विपक्ष की रणनीति और जनता के बीच संदेश पर भी असर डालते हैं। धर्मेंद्र प्रधान के मामले में आगे की राजनीतिक प्रतिक्रिया और इसके प्रभाव पर नजर रहेगी।



