SAARC को फिर से सक्रिय करने की मांग तेज, पड़ोसी देशों की पहल से पाकिस्तान को मिल सकता है फायदा

दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग संगठन SAARC (South Asian Association for Regional Cooperation) को दोबारा सक्रिय करने की मांग एक बार फिर चर्चा में है। मालदीव, बांग्लादेश और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों की ओर से क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने और संगठन को प्रभावी बनाने की बात कही जा रही है।
SAARC की गतिविधियां पिछले कई वर्षों से लगभग ठप हैं। इसका सबसे बड़ा कारण भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को माना जाता है। 2016 में प्रस्तावित SAARC शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में होना था, लेकिन सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत समेत कई देशों के रुख के बाद यह आयोजित नहीं हो सका।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर SAARC दोबारा सक्रिय होता है तो दक्षिण एशियाई देशों के बीच व्यापार, संपर्क, ऊर्जा और विकास से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ सकता है। हालांकि, इसके साथ ही पाकिस्तान को भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मंच मिल सकता है, जिससे उसकी कूटनीतिक स्थिति मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।
भारत के लिए SAARC को लेकर संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण रहा है। एक ओर भारत क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा चिंताओं और आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर सतर्क रुख अपनाता है।
दक्षिण एशिया में कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं और विकास जरूरतें एक-दूसरे से जुड़ी हैं। ऐसे में SAARC के भविष्य को लेकर आने वाले समय में सदस्य देशों के बीच बातचीत और कूटनीतिक प्रयास अहम भूमिका निभा सकते हैं।



