तुर्की को F-35 देने पर ट्रंप के रुख से इजरायल चिंतित, अब खुद बनाएगा स्टील्थ फाइटर जेट?

अमेरिका और तुर्की के बीच F-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान कार्यक्रम को लेकर चल रही चर्चाओं ने इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को फिर चर्चा में ला दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर तुर्की को दोबारा F-35 कार्यक्रम में शामिल करने की दिशा में कदम बढ़ते हैं, तो इजरायल अपनी रक्षा आत्मनिर्भरता को और मजबूत करने पर ध्यान दे सकता है।
इजरायल पहले से ही अमेरिका के F-35 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करता है और उसके पास इस विमान का उन्नत संस्करण मौजूद है। हालांकि, क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को देखते हुए इजरायल अपनी स्वदेशी सैन्य तकनीक विकसित करने पर भी जोर देता रहा है।
इजरायल स्वदेशी स्टील्थ विमान क्यों बनाना चाहता है?
- रणनीतिक आत्मनिर्भरता: किसी एक देश की तकनीक पर पूरी तरह निर्भरता कम करना।
- क्षेत्रीय सुरक्षा: मध्य-पूर्व में बदलते सैन्य संतुलन के बीच अपनी बढ़त बनाए रखना।
- तकनीकी क्षमता: एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग में अपनी विशेषज्ञता का विस्तार करना।
इजरायल की एयरोस्पेस इंडस्ट्री पहले से ही लड़ाकू विमानों के अपग्रेड, ड्रोन और अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों में मजबूत भूमिका निभाती है। हालांकि, एक नए स्टील्थ फाइटर का विकास बेहद महंगा और लंबी अवधि वाला प्रोजेक्ट होता है।
F-35 जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में रडार से बचने की क्षमता, उन्नत सेंसर और नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता जैसी तकनीकें शामिल होती हैं। ऐसे विमान को विकसित करने के लिए बड़े पैमाने पर शोध, निवेश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी क्षमता की जरूरत होती है।
वहीं, तुर्की भी अपनी स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान परियोजना KAAN fighter jet पर काम कर रहा है। इससे संकेत मिलता है कि दुनिया के कई देश भविष्य की वायु शक्ति के लिए स्वदेशी स्टील्थ तकनीक पर जोर दे रहे हैं।
नोट: रक्षा परियोजनाओं से जुड़ी घोषणाएं अक्सर रणनीतिक स्तर पर होती हैं और वास्तविक उत्पादन, समयसीमा व क्षमता कई कारकों पर निर्भर करती है।



