Meta को केंद्र की चेतावनी, ग्लोबल पॉलिसी नहीं भारतीय कानून भी मानना होगा

केंद्र सरकार और सोशल मीडिया कंपनी Meta के बीच डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालन और कानूनों के पालन को लेकर सख्ती बढ़ती दिखाई दे रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में काम करने वाली Meta की सेवाओं को अपनी वैश्विक नीतियों के साथ-साथ भारतीय कानूनों का भी पूरी तरह पालन करना होगा।
सरकार का कहना है कि भारत में Facebook, Instagram और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर लागू स्थानीय कानूनों और डिजिटल नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती। सूचना प्रौद्योगिकी कानून और उससे जुड़े नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय की गई है।
ग्लोबल पॉलिसी के बजाय भारतीय नियमों पर जोर
केंद्र का संदेश है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनी की वैश्विक नीति भारत के कानून से ऊपर नहीं हो सकती। भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म को स्थानीय कानूनी व्यवस्था, कंटेंट संबंधी नियमों और सरकार की ओर से जारी वैध निर्देशों का पालन करना होगा।
Meta पर क्यों बढ़ा दबाव?
हाल के महीनों में भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर सरकार की निगरानी बढ़ी है। जुलाई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो को Meta के प्लेटफॉर्म पर कुछ समय के लिए रोके जाने के बाद सरकार ने कंपनी के वैश्विक अधिकारियों को तलब भी किया था। Meta ने बाद में इसे गलती बताते हुए वीडियो बहाल कर दिया था।
डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर सरकार सख्त
सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म को अवैध या हानिकारक कंटेंट से निपटने के लिए निर्धारित कानूनी दायित्वों का पालन करना होगा। भारत में डिजिटल स्पेस को सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाने के लिए IT Act और IT Rules के तहत प्लेटफॉर्म पर कई जिम्मेदारियां तय हैं।
इस घटनाक्रम से साफ है कि भारत सरकार विदेशी टेक कंपनियों के लिए स्थानीय कानूनों के अनुपालन को लेकर अपना रुख और सख्त कर रही है। आने वाले समय में Meta समेत बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों के लिए भारतीय नियामकीय व्यवस्था के अनुरूप काम करना और भी महत्वपूर्ण हो सकता है।



