खांसते-खांसते सिर में क्यों होने लगता है दर्द? जानें Cough Headache कितना खतरनाक

कई लोगों को तेज खांसी या छींक के तुरंत बाद सिर में तेज दर्द महसूस होता है। इसे कफ हेडेक कहा जाता है। ज्यादातर मामलों में यह कुछ समय में ठीक हो जाता है, लेकिन पहली बार अचानक होने वाला सिरदर्द या इसके साथ चक्कर, बेहोशी और नजर संबंधी परेशानी जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
खांसते-खांसते सिर में क्यों होने लगता है दर्द?
सर्दी-जुकाम, एलर्जी या किसी दूसरी वजह से लगातार खांसी हो तो सिर में दर्द होना आम अनुभव हो सकता है। कई बार तेज खांसी के तुरंत बाद सिर में अचानक तेज, चुभने वाला या फटने जैसा दर्द महसूस होता है। इसे Cough Headache यानी कफ हेडेक कहा जाता है।
मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार खांसी, छींकने या जोर लगाने से छाती और पेट के अंदर दबाव बढ़ता है। इससे सिर के अंदर दबाव में भी अस्थायी बदलाव हो सकता है, जिसके कारण सिरदर्द शुरू हो सकता है।
क्या हर खांसी के बाद होने वाला सिरदर्द कफ हेडेक है?
जरूरी नहीं। कफ हेडेक की खासियत यह है कि दर्द खांसने या जोर लगाने के तुरंत बाद शुरू होता है। छींकने, नाक साफ करने, जोर लगाने, हंसने या कभी-कभी भारी वजन उठाने जैसी गतिविधियां भी इसे ट्रिगर कर सकती हैं।
अगर पहले से माइग्रेन या कोई दूसरा सिरदर्द है और खांसने पर उसका दर्द बढ़ जाता है, तो उसे अपने आप में कफ हेडेक नहीं कहा जाता।
कफ हेडेक कितनी देर रहता है?
प्राइमरी कफ हेडेक में दर्द आमतौर पर अचानक शुरू होता है और कुछ सेकंड से कुछ मिनट तक रहता है। कुछ मामलों में यह ज्यादा देर भी रह सकता है। दर्द सिर के दोनों तरफ या खासकर पीछे की तरफ महसूस हो सकता है।
अक्सर यह दर्द खांसी रुकने के बाद धीरे-धीरे कम हो जाता है।
कफ हेडेक के दो प्रकार होते हैं
कफ हेडेक को मुख्य रूप से दो प्रकारों में बांटा जाता है—
1. प्राइमरी कफ हेडेक
इसमें सिरदर्द के पीछे कोई दूसरी बीमारी नहीं होती। यह आमतौर पर खांसने या जोर लगाने से शुरू होता है और अपने आप ठीक हो जाता है। इसे सामान्यतः गंभीर नहीं माना जाता, लेकिन इसका निदान डॉक्टर द्वारा अन्य कारणों को बाहर करने के बाद ही किया जाता है।
2. सेकेंडरी कफ हेडेक
इसमें खांसी सिरदर्द को ट्रिगर करती है, लेकिन असली वजह दिमाग या उसके आसपास की संरचनाओं से जुड़ी कोई समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में Chiari malformation, मस्तिष्क में ट्यूमर, रक्त वाहिका से जुड़ी समस्या या cerebrospinal fluid से संबंधित परेशानी इसके पीछे हो सकती है।
यही वजह है कि नया या असामान्य कफ हेडेक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कब खतरनाक हो सकता है कफ हेडेक?
अगर खांसने के बाद सिरदर्द पहली बार हुआ है, अचानक बहुत तेज है या बार-बार हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। खासकर इन लक्षणों के साथ तुरंत मेडिकल जांच जरूरी हो सकती है:
- चक्कर आना या शरीर का संतुलन बिगड़ना
- बेहोशी
- हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन
- धुंधला या दोहरा दिखाई देना
- बोलने या चलने में परेशानी
- लगातार या बढ़ता हुआ सिरदर्द
- बहुत अचानक और असहनीय सिरदर्द
ऐसे लक्षण गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।
डॉक्टर कौन से टेस्ट करा सकते हैं?
अगर डॉक्टर को सेकेंडरी कफ हेडेक का संदेह होता है तो वे लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर जांच कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर MRI या CT स्कैन जैसे ब्रेन इमेजिंग टेस्ट किए जा सकते हैं। कुछ विशेष परिस्थितियों में अन्य जांच भी आवश्यक हो सकती है।
हर व्यक्ति को स्कैन की जरूरत हो, ऐसा जरूरी नहीं है। जांच का फैसला डॉक्टर लक्षणों और शारीरिक परीक्षण के आधार पर करते हैं।
खांसी का इलाज भी जरूरी है
अगर लगातार खांसी ही सिरदर्द को ट्रिगर कर रही है तो उसकी वजह पता लगाना जरूरी है। खांसी के पीछे सर्दी-जुकाम, एलर्जी, अस्थमा, एसिड रिफ्लक्स, पोस्टनेजल ड्रिप या अन्य श्वसन संबंधी समस्या हो सकती है।
इसलिए सिर्फ सिरदर्द की दवा लेने के बजाय बार-बार होने वाली खांसी का कारण भी समझना जरूरी है।
लगातार खांसी को भी नजरअंदाज न करें
अगर खांसी कई हफ्तों तक बनी रहती है, बढ़ती जाती है या उसके साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, खून वाला बलगम, तेज बुखार या घरघराहट जैसे लक्षण हैं तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
क्या कफ हेडेक से बचा जा सकता है?
अगर सिरदर्द का कारण बार-बार होने वाली खांसी या जोर लगाना है तो मूल कारण का इलाज मदद कर सकता है। कब्ज के कारण ज्यादा जोर लगाना, भारी वजन उठाना या ऐसी गतिविधियां जो बार-बार सिरदर्द ट्रिगर करती हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियंत्रित करना उपयोगी हो सकता है।
निष्कर्ष:
खांसते ही सिर में दर्द होना हमेशा खतरनाक बीमारी का संकेत नहीं होता। कई बार तेज खांसी से दबाव में अस्थायी बदलाव के कारण प्राइमरी कफ हेडेक हो सकता है। लेकिन पहली बार हुआ अचानक तेज सिरदर्द, बार-बार होने वाला दर्द या उसके साथ चक्कर, बेहोशी, कमजोरी अथवा नजर संबंधी समस्या हो तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से जांच कराएं।
नोट: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। किसी व्यक्ति के लक्षणों के आधार पर बीमारी का निदान केवल योग्य चिकित्सक कर सकते हैं।



