यूपी में 73 हजार वक्फ संपत्तियां रिकॉर्ड से गायब! मोहसिन रजा ने SIT जांच की मांग की

उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। पूर्व मंत्री मोहसिन रजा ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में दर्ज वक्फ संपत्तियों में से करीब 73 हजार संपत्तियां दस्तावेजों या रिकॉर्ड से गायब हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT जांच और विशेष ऑडिट की मांग की है।
क्या है 73 हजार संपत्तियों का मामला?
मोहसिन रजा के अनुसार, उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों की संख्या करीब 2 लाख से अधिक होनी चाहिए, जबकि उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड में लगभग 1.27 लाख संपत्तियां दर्ज दिखाई देती हैं। इस अंतर को उन्होंने गंभीर अनियमितता बताते हुए जांच की मांग की है।
हालांकि, यह आंकड़ा अभी आरोप/दावे के रूप में सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि वास्तव में 73 हजार संपत्तियां अवैध रूप से रिकॉर्ड से हटाई गई हैं। इसलिए अंतिम स्थिति जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।
मोहसिन रजा ने क्या मांग की?
मोहसिन रजा ने मामले की जांच के लिए जनपदवार SIT गठित करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का विशेष ऑडिट कराने की बात कही है, ताकि रिकॉर्ड में दर्ज और जमीन पर मौजूद संपत्तियों का मिलान किया जा सके।
उनकी मांगों में कथित रूप से कब्जाई गई वक्फ संपत्तियों की पहचान और उन्हें वापस लेने की कार्रवाई भी शामिल है।
पहले भी लगा चुके हैं बड़े आरोप
मोहसिन रजा इससे पहले भी यूपी के शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों के कामकाज में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगा चुके हैं। जुलाई 2026 में उन्होंने राज्यव्यापी ऑडिट, संपत्तियों के सत्यापन और कथित अवैध कब्जों से संपत्तियां वापस लेने की मांग की थी।
उन्होंने यह भी दावा किया था कि कई वर्षों तक वक्फ बोर्डों का नियमित ऑडिट नहीं हुआ और कुछ मामलों में ऑडिट प्रक्रिया में अधिकारियों का सहयोग नहीं मिला।
किन शहरों की संपत्तियों का जिक्र?
मोहसिन रजा ने पहले लखनऊ, गाजियाबाद, कानपुर, मेरठ, अयोध्या, आगरा, प्रयागराज और वाराणसी सहित कई जिलों में वक्फ संपत्तियों पर कथित कब्जे और अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। इन आरोपों की भी स्वतंत्र जांच की जरूरत है।
SIT जांच से क्या होगा?
यदि सरकार SIT जांच का आदेश देती है, तो जांच एजेंसी रिकॉर्ड में दर्ज वक्फ संपत्तियों का जमीन पर मौजूद संपत्तियों से मिलान कर सकती है। इसके अलावा पुराने दस्तावेज, रजिस्टर, संपत्ति हस्तांतरण और कब्जे से जुड़े मामलों की भी जांच की जा सकती है।
इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि रिकॉर्ड में अंतर रिकॉर्ड अपडेट न होने, दस्तावेजों की कमी, प्रशासनिक त्रुटि या कथित अनियमितता की वजह से है।
ध्यान देने वाली बात
इस पूरे मामले में 73 हजार संपत्तियों के गायब होने को फिलहाल स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। यह संख्या मोहसिन रजा द्वारा लगाए गए आरोप/दावे से जुड़ी है। उपलब्ध रिपोर्टों में वक्फ बोर्ड या विपक्ष की ओर से इस दावे पर तत्काल विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं बताई गई है।
निष्कर्ष
यूपी में वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड को लेकर उठे इस मुद्दे ने राजनीतिक और प्रशासनिक बहस तेज कर दी है। मोहसिन रजा ने 73 हजार संपत्तियों के रिकॉर्ड से गायब होने का दावा करते हुए SIT जांच और विशेष ऑडिट की मांग की है। अब पूरे मामले की वास्तविक स्थिति आधिकारिक रिकॉर्ड के सत्यापन और किसी स्वतंत्र जांच के बाद ही साफ हो सकेगी।



