भारत-पाकिस्तान तनाव: सऊदी के जरिए अगली जंग का खतरा? IMEC पर इजरायली एक्सपर्ट की चेतावनी

भारत-पाकिस्तान के बीच भविष्य में संभावित सैन्य टकराव को लेकर एक इजरायली विशेषज्ञ का विश्लेषण चर्चा में है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक विशेषज्ञ ने आशंका जताई है कि अगली भारत-पाक जंग में सऊदी अरब की भूमिका अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है और India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) भी बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के कारण दबाव में आ सकता है। हालांकि, इसे विशेषज्ञ का आकलन समझना चाहिए, किसी संभावित युद्ध की निश्चित भविष्यवाणी नहीं।
Mecca Defence Agreement क्यों अहम?
7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने मक्का में संयुक्त रक्षा समझौता किया। इसके तहत किसी सदस्य पर हमला होने की स्थिति को तीनों के खिलाफ हमला माना जाने का सिद्धांत रखा गया है। पाकिस्तान ने इसे रक्षात्मक समझौता बताया है और कहा है कि यह किसी खास देश के खिलाफ नहीं है।
यह समझौता भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब के पुराने रक्षा संबंध अब तुर्किये के साथ भी व्यापक ढांचे में जुड़ रहे हैं। हालांकि इसे सीधे भारत-पाकिस्तान युद्ध के लिए बना सैन्य गठबंधन मानना अभी उचित नहीं होगा; समझौते की वास्तविक सैन्य बाध्यताएं और संचालन संबंधी विवरण सीमित हैं।
क्या अगली जंग में सऊदी पाकिस्तान का साथ देगा?
यही सबसे बड़ा सवाल है। सऊदी अरब और भारत के बीच भी महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं। इसलिए किसी भारत-पाक संघर्ष की स्थिति में रियाद का रुख केवल पाकिस्तान के साथ रक्षा संबंधों से तय होगा, ऐसा मानना जल्दबाजी होगी।
सऊदी अरब ने हालिया रक्षा समझौते को क्षेत्रीय सुरक्षा और सामूहिक रक्षा के नजरिए से पेश किया है। विश्लेषकों के मुताबिक रियाद का मकसद अपनी सुरक्षा क्षमता बढ़ाना और किसी एक बाहरी शक्ति पर अत्यधिक निर्भरता कम करना भी है।
IMEC पर क्यों पड़ सकता है असर?
IMEC भारत को अरब प्रायद्वीप के जरिए यूरोप से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी आर्थिक और परिवहन परियोजना है। इसमें भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच समुद्री और रेल कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है।
इस परियोजना के लिए सऊदी अरब बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए पश्चिम एशिया में किसी बड़े सैन्य या राजनीतिक संकट का असर IMEC की सुरक्षा, निवेश और लॉजिस्टिक्स पर पड़ सकता है। पहले भी विश्लेषकों ने क्षेत्रीय संघर्षों को IMEC के लिए जोखिम माना है।
भारत का रुख क्या है?
भारत ने Mecca Joint Defence Agreement को लेकर तत्काल किसी आक्रामक प्रतिक्रिया के बजाय इसके राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव का अध्ययन करने की बात कही है। विदेश मंत्रालय के अनुसार नई दिल्ली घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रही है।
इसलिए फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि सऊदी-पाकिस्तान-तुर्किये समझौता अपने आप भारत-पाक युद्ध की ओर इशारा नहीं करता। लेकिन अगर दक्षिण एशिया में भविष्य में संघर्ष होता है, तो पश्चिम एशिया में बन रहे नए सुरक्षा समीकरण भारत की रणनीतिक गणनाओं को जरूर प्रभावित कर सकते हैं।



