UGC-NET में गड़बड़ी पर NTA को फटकार, शिक्षा मंत्री ने मांगी रिपोर्ट

UGC-NET 2026 परीक्षा में सामने आई गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने NTA के अधिकारियों के साथ बैठक कर परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और एजेंसी को प्रक्रियाओं में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए।
मामला खास तौर पर UGC-NET के इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों के प्रश्नपत्रों से जुड़ा है। विशेषज्ञ समिति की समीक्षा में इन पेपरों में तथ्यात्मक, भाषाई और अनुवाद संबंधी कई गलतियां सामने आईं। सोशियोलॉजी के पेपर में कई प्रश्नों के दोहराए जाने की शिकायत भी सामने आई थी।
गड़बड़ियों की गंभीरता को देखते हुए NTA ने इन तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया है। री-एग्जाम 9 और 10 सितंबर 2026 को आयोजित किए जाएंगे। जिन अभ्यर्थियों ने पहले परीक्षा दी थी, उनसे दोबारा परीक्षा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने NTA को परीक्षा प्रक्रिया का व्यापक ऑडिट करने का निर्देश दिया है। इसके तहत प्रश्नपत्र तैयार करने, गोपनीय सामग्री की सुरक्षा, डिजिटल सिस्टम और परीक्षा संचालन से जुड़ी प्रक्रियाओं की समीक्षा की जाएगी। सुधार के लिए उठाए गए कदमों की रिपोर्ट भी मंत्रालय को सौंपनी होगी।
सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर सुधार लागू करने पर भी जोर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार NTA में 50 से अधिक कर्मचारियों को हटाया गया है और महत्वपूर्ण पदों पर नए विशेषज्ञों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। प्राइवेट सेक्टर के विशेषज्ञों की मदद लेने की योजना भी बताई गई है।
मंत्रालय की ओर से परीक्षा संचालन से जुड़े गोपनीय सिस्टम को और मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए हैं। कॉन्फिडेंशियल ऑपरेशंस, एयर-गैप्ड सिस्टम, अलग कमरों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जमा कराने जैसी व्यवस्थाओं में बदलाव पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य प्रश्नपत्रों और परीक्षा सामग्री की सुरक्षा बढ़ाना है।
NTA ने यह भी स्पष्ट किया है कि तीन विषयों की दोबारा परीक्षा का असर क्वालिफाइंग उम्मीदवारों की संख्या या विषयवार सीट आवंटन पर नहीं पड़ेगा। इससे प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है। एजेंसी का लक्ष्य दोबारा परीक्षा के जरिए निष्पक्षता और परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना है।
UGC-NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में प्रश्नपत्र की गुणवत्ता और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में हालिया गड़बड़ियों के बाद NTA पर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का दबाव बढ़ गया है। अब मंत्रालय की समीक्षा और ऑडिट के बाद परीक्षा प्रणाली में क्या स्थायी बदलाव किए जाते हैं, इस पर उम्मीदवारों की नजर रहेगी।



