यूपी में VLTD-पैनिक बटन के नाम पर लूट

उत्तर प्रदेश में वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) और पैनिक बटन लगाने के नाम पर अधिक शुल्क वसूले जाने का आरोप है। वाहन मालिकों का कहना है कि दूसरे राज्यों में जहां इस पूरी प्रक्रिया के लिए लगभग 4 हजार रुपये तक खर्च हो रहे हैं, वहीं यूपी में उनसे करीब 16 हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं।
इस भारी अंतर को लेकर वाहन संचालकों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका सवाल है कि जब समान तकनीकी उपकरण और प्रक्रिया के लिए दूसरे राज्यों में कम शुल्क निर्धारित है, तो उत्तर प्रदेश में इतनी अधिक रकम क्यों ली जा रही है। इससे परिवहन विभाग की शुल्क व्यवस्था और संबंधित प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
VLTD और पैनिक बटन का उद्देश्य वाहनों की निगरानी और आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा को बेहतर बनाना है। पैनिक बटन के जरिए जरूरत पड़ने पर मदद हासिल करने की व्यवस्था की जाती है, जबकि VLTD से वाहन की लोकेशन की निगरानी संभव होती है।
वाहन मालिकों का आरोप है कि सुरक्षा से जुड़ी इस अनिवार्य व्यवस्था को लागू करने के नाम पर उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। खासकर व्यावसायिक वाहन संचालकों के लिए 16 हजार रुपये का खर्च एक बड़ी रकम है। उनका कहना है कि सरकार को इस शुल्क की समीक्षा कर इसे दूसरे राज्यों के अनुरूप करने पर विचार करना चाहिए।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि VLTD और पैनिक बटन लगाने की वास्तविक लागत कितनी है और उत्तर प्रदेश में वाहन मालिकों से वसूली जा रही रकम का आधार क्या है। यदि शुल्क में इतना बड़ा अंतर है तो इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि वाहन मालिकों को पूरी प्रक्रिया और खर्च का पता चल सके।
अब वाहन संचालकों की नजर परिवहन विभाग और सरकार की ओर है। यदि शुल्क में अनियमितता या अनावश्यक वसूली की पुष्टि होती है, तो इस पर कार्रवाई और शुल्क में कमी की मांग तेज हो सकती है।



