लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर टोल सस्पेंड, IIT खड़गपुर की रिपोर्ट के बाद ही होगा फैसला

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के शुरू होने के कुछ ही समय बाद सड़क धंसने की घटना ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए थे। NHAI ने इसके बाद टोल वसूली रोक दी और जिम्मेदार एजेंसी तथा निगरानी से जुड़े अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू की। अब IIT खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम एक्सप्रेसवे की तकनीकी स्थिति और धंसाव के कारणों की जांच कर रही है।
300 मीटर हिस्से में हुआ था धंसाव
NHAI के अनुसार 26 जुलाई 2026 को किलोमीटर 64 के पास करीब 300 मीटर हिस्से में स्लिपेज पाया गया था। प्रभावित स्थान पर यातायात को डायवर्ट कर दिया गया और मरम्मत का काम शुरू किया गया।
यह एक्सप्रेसवे करीब 63 किलोमीटर लंबा है और लगभग ₹4,200 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। इसका उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था, यानी सड़क में समस्या सामने आने में ज्यादा समय नहीं लगा।
टोल क्यों किया गया बंद?
NHAI ने साफ किया है कि प्रभावित हिस्से की पूरी तरह मरम्मत होने तक एक्सप्रेसवे पर कोई टोल नहीं लिया जाएगा। टोल न वसूले जाने से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई संबंधित कंसेशनायर से कराने की व्यवस्था की गई है।
IIT खड़गपुर करेगा तकनीकी जांच
मामले की गहराई से जांच के लिए IIT खड़गपुर के प्रोफेसर के. एस. रेड्डी के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम लगाई गई है। टीम धंसाव के वास्तविक कारणों का पता लगाएगी और भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न हो, इसके लिए सुधारात्मक उपाय सुझाएगी।
इसके अलावा NHAI पूरे एक्सप्रेसवे के पेवमेंट की स्थिति जांचने के लिए Laser Profilometer तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। इससे सड़क की सतह की अनियमितताओं और उसकी गुणवत्ता का व्यापक आकलन किया जाएगा।
निर्माण एजेंसी पर भी कार्रवाई
NHAI ने निर्माण एजेंसी PNC Infratech के खिलाफ नॉन-परफॉर्मर नोटिस जारी किया है। कंपनी को प्रभावित हिस्से की मरम्मत अपने खर्च पर कराने को कहा गया है, जिसकी शुरुआती लागत करीब ₹3 करोड़ आंकी गई है। साथ ही परफॉर्मेंस सिक्योरिटी पर 2 प्रतिशत जुर्माने की कार्रवाई भी शुरू की गई है।
परियोजना की निगरानी से जुड़े अधिकारियों और स्वतंत्र अभियंता के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
अभी यात्रियों को टोल नहीं देना होगा
फिलहाल एक्सप्रेसवे से गुजरने वाले वाहन चालकों को टोल भुगतान नहीं करना होगा। टोल दोबारा कब शुरू होगा, इसकी कोई निश्चित तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। NHAI के मुताबिक पहले प्रभावित हिस्से की पूरी मरम्मत और तकनीकी जांच जरूरी है।
हालांकि 23 अगस्त की रिपोर्टों में एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद कुछ अन्य स्थानों पर भी डामर उखड़ने, सड़क धंसने और डिवाइडर में दरार जैसी समस्याओं की खबरें सामने आई हैं। इससे परियोजना की गुणवत्ता को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं।



