IWT: SCO में शहबाज शरीफ ने उठाया सिंधु जल संधि का मुद्दा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को SCO शिखर सम्मेलन में भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल विवाद का मुद्दा उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में उन्होंने साझा जल संसाधनों को लेकर पाकिस्तान का पक्ष रखा।
शहबाज शरीफ ने पानी को क्षेत्र की ‘जीवन रेखा’ बताते हुए कहा कि इसे किसी भी परिस्थिति में हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने साझा नदियों से जुड़े समझौतों को महत्वपूर्ण और बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता बताया।
पाकिस्तान का यह बयान भारत द्वारा हेग स्थित मध्यस्थता अदालत के हालिया फैसले को खारिज किए जाने के एक दिन बाद आया है। अदालत ने सिंधु जल संधि को लागू मानते हुए उससे जुड़े विवाद पर फैसला दिया था, लेकिन भारत ने अदालत के अधिकार क्षेत्र और कार्यवाही को स्वीकार नहीं किया है।
सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी। इसके तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के अधिकार और जिम्मेदारियां तय की गई थीं। लंबे समय तक तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद यह समझौता दोनों देशों के बीच जल प्रबंधन का आधार रहा है।
भारत ने 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला किया था। भारत का कहना है कि पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देने की स्थिति में सामान्य जल संबंध जारी नहीं रखे जा सकते। पाकिस्तान इस रुख का विरोध करता रहा है।
शहबाज शरीफ ने SCO मंच से कहा कि पानी करोड़ों लोगों के जीवन, कृषि और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है। उनका कहना था कि साझा जल संसाधनों को राजनीतिक दबाव का माध्यम बनाने के बजाय सहयोग और बातचीत के जरिए समाधान तलाशना चाहिए।
दूसरी ओर, भारत अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता प्रक्रिया को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर चुका है। भारतीय पक्ष का कहना है कि संबंधित मध्यस्थता व्यवस्था को भारत ने स्वीकार नहीं किया है और वह संप्रभु फैसलों पर उसके अधिकार क्षेत्र को नहीं मानता।
SCO समिट में सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाना भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ दोनों देशों के बीच आतंकवाद और सुरक्षा को लेकर मतभेद हैं, वहीं दूसरी तरफ जल संसाधनों का विवाद भी लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया जा रहा है।
सिंधु जल विवाद आने वाले समय में भी भारत-पाकिस्तान संबंधों का अहम मुद्दा बना रह सकता है। फिलहाल दोनों देशों के रुख में बड़ा अंतर है और जल समझौते को लेकर किसी समाधान तक पहुंचने के लिए कूटनीतिक और कानूनी स्तर पर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।



