P4M क्या है? भारत की सह-अध्यक्षता में शुरू हुआ नया वैश्विक मंच
दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, संघर्ष, व्यापारिक दबाव और सप्लाई चेन में अनिश्चितता के बीच P4M को एक ऐसे खुले मंच के रूप में पेश किया गया है, जहां अलग-अलग क्षेत्रों और राजनीतिक व्यवस्थाओं वाले देश साझा मुद्दों पर सहयोग कर सकें। पहल का जोर बहुपक्षवाद को मजबूत करने और वैश्विक संस्थाओं को बदलती दुनिया के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाने पर है।
P4M क्या है?
P4M का पूरा नाम Partners for Multilateralism, International Law, Peace and Prosperity है। यह एक खुला और लचीला सहयोग मंच है, जिसका उद्देश्य अलग-अलग देशों को साझा सिद्धांतों और व्यावहारिक मुद्दों पर साथ लाना है। इसकी पहल संयुक्त राष्ट्र महासभा की हाई-लेवल वीक के दौरान सामने आई।
इसके शुरुआती सह-प्रायोजकों में भारत, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा और केन्या शामिल हैं। यह संरचना बताती है कि P4M को किसी एक क्षेत्र या एक राजनीतिक समूह तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों की भागीदारी वाला मंच बनाने की कोशिश की गई है।
भारत की क्या भूमिका है?
भारत इस पहल के शुरुआती सह-प्रायोजकों में शामिल है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने P4M के उद्घाटन सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। उन्होंने वैश्विक व्यवस्था में बढ़ते तनाव और संघर्षों के बीच बहुपक्षवाद को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
जयशंकर ने यह भी कहा कि वैश्विक व्यवस्था में बदलाव लंबे समय से चल रहा है, लेकिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा और वास्तविक संघर्षों ने इसे अधिक जटिल बना दिया है। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना जरूरी है, ताकि वैश्विक चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटा जा सके।
अमेरिका, रूस और चीन के संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण है?
P4M की घोषणा में किसी एक देश को निशाना बनाने की बात नहीं है। इसके बजाय इसमें अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में बढ़ते ध्रुवीकरण, शक्ति-राजनीति, संरक्षणवाद और आर्थिक दबाव जैसी व्यापक चुनौतियों का उल्लेख किया गया है। पहल का घोषित उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करना है।
इसलिए इसे सीधे तौर पर अमेरिका, रूस या चीन के खिलाफ गठबंधन कहना सही नहीं होगा। बल्कि P4M का फोकस ऐसी वैश्विक व्यवस्था पर है जिसमें अधिक देशों की भागीदारी हो और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी, प्रतिनिधित्वपूर्ण और समावेशी बने।
UN में सुधार पर जोर
P4M घोषणा में संयुक्त राष्ट्र समेत बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और उन्हें अधिक प्रभावी तथा प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की बात कही गई है। इसके तहत संघर्षों की रोकथाम, संकटों से निपटने, सतत विकास, निष्पक्ष व्यापार, मानवाधिकार और कानून के शासन जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
यानी P4M केवल राजनीतिक संवाद का मंच नहीं है। इसके एजेंडे में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था, डिजिटल बदलाव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे विषय भी शामिल हैं।
4F संकट पर भी चर्चा
P4M सम्मेलन में 4F संकट का मुद्दा भी सामने आया। इसमें Fuel यानी ईंधन, Food यानी खाद्य, Fertiliser यानी उर्वरक और Finance यानी वित्त को शामिल किया गया है। जयशंकर ने कहा कि इन क्षेत्रों में पैदा होने वाले दबावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
भारत ने सप्लाई चेन में किसी एक मार्ग या स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता से जुड़े जोखिमों को कम करने और विविधीकरण की जरूरत पर भी जोर दिया। यह मुद्दा ऊर्जा, खाद्य और वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है।
AI और नई तकनीक भी एजेंडे में
P4M की घोषणा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और दूसरी उभरती तकनीकों से जुड़े मुद्दों को भी शामिल किया गया है। तेजी से बदलती तकनीकी क्षमता के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नियम और सुरक्षा ढांचे विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
इसके अलावा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, वैश्विक स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर भी साझा प्रयास बढ़ाने की बात कही गई है।
क्या P4M कोई नया ‘ब्लॉक’ है?
P4M की आधिकारिक घोषणा के अनुसार इसे किसी नए विशेष या बंद समूह के तौर पर पेश नहीं किया गया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों के ऐसे देशों के लिए खुला मंच तैयार करना है जो बहुपक्षीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय कानून के साझा सिद्धांतों पर काम करना चाहते हैं।
इसलिए P4M को मौजूदा वैश्विक संस्थाओं का विकल्प बताने के बजाय उन्हें मजबूत और सुधारने की पहल के रूप में समझना अधिक सटीक है। आने वाले समय में इसकी वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सदस्य देश साझा घोषणाओं को कितने व्यावहारिक सहयोग में बदल पाते हैं।



