India Maldives Currency Swap: मालदीव को भारत की फिर मदद, ₹3,000 करोड़ की सुविधा का रोलओवर मंजूर

भारत ने मालदीव की 30 अरब रुपये की करेंसी स्वैप सुविधा को आगे बढ़ाने के अनुरोध को मंजूरी दे दी है। मालदीव के मीडिया संस्थानों की रिपोर्टों के अनुसार, इस सुविधा की अदायगी की समयसीमा अक्टूबर 2026 में पूरी होने वाली थी। मालदीव सरकार ने भुगतान के लिए अतिरिक्त समय मांगा था, जिसे भारत ने मंजूर कर लिया। यह राशि भारतीय रुपये में 30 अरब रुपये यानी करीब 3,000 करोड़ रुपये है। इस फैसले से मालदीव को तत्काल विदेशी मुद्रा दबाव संभालने में मदद मिल सकती है। <Cite refs={[“turn123410search8″,”turn123410search6”]} />
क्या है करेंसी स्वैप सुविधा?
करेंसी स्वैप एक ऐसी वित्तीय व्यवस्था है, जिसके तहत दो देशों के केंद्रीय बैंक या संबंधित मौद्रिक संस्थान तय शर्तों पर एक-दूसरे की मुद्रा उपलब्ध कराते हैं। इसका उद्देश्य किसी देश को अल्पकालिक विदेशी मुद्रा की जरूरत, भुगतान संतुलन के दबाव और नकदी संकट से निपटने में सहायता देना होता है। भारत और मालदीव के बीच यह व्यवस्था दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) के करेंसी स्वैप फ्रेमवर्क के तहत की गई है। यह सुविधा सामान्य अनुदान नहीं, बल्कि निर्धारित शर्तों के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता है।
RBI और मालदीव के बीच कब हुआ था समझौता?
भारतीय रिजर्व बैंक और मालदीव मॉनेटरी अथॉरिटी के बीच करेंसी स्वैप समझौता अक्टूबर 2024 में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत यात्रा के दौरान हुआ था। इस समझौते के तहत मालदीव को अमेरिकी डॉलर/यूरो विंडो के अंतर्गत 400 मिलियन डॉलर और भारतीय रुपये की विंडो के अंतर्गत 30 अरब रुपये तक की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। अप्रैल 2026 में मालदीव को 30 अरब रुपये की सुविधा के तहत पहली निकासी की मंजूरी मिली थी। अब उसी रुपये वाली सुविधा को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
आर्थिक संकट से जूझ रहा है मालदीव
मालदीव की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर काफी निर्भर है और उसे विदेशी मुद्रा भंडार, बाहरी भुगतान तथा सरकारी वित्तीय जरूरतों से जुड़े दबावों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में करेंसी स्वैप जैसी व्यवस्था सरकार को अल्पकालिक वित्तीय जरूरतें पूरी करने में मदद कर सकती है। हालांकि, इस सुविधा का रोलओवर मालदीव की सभी आर्थिक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं है। दीर्घकालिक स्थिरता के लिए विदेशी मुद्रा आय, सरकारी खर्च और बाहरी कर्ज का प्रभावी प्रबंधन भी जरूरी होगा।
‘इंडिया आउट’ अभियान और भारत-मालदीव संबंध
राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के राजनीतिक अभियान में ‘इंडिया आउट’ का नारा प्रमुखता से सामने आया था। उनके सत्ता में आने के बाद भारत और मालदीव के संबंधों में कुछ मुद्दों पर तनाव देखने को मिला, खासकर मालदीव में भारतीय सैन्य कर्मियों की मौजूदगी को लेकर। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और उच्चस्तरीय बातचीत जारी रही। करेंसी स्वैप सुविधा को आगे बढ़ाने का फैसला दिखाता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद वित्तीय और क्षेत्रीय सहयोग के रास्ते खुले हुए हैं।
भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का उद्देश्य पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक, सुरक्षा और विकास संबंधी सहयोग को मजबूत करना है। मालदीव हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का महत्वपूर्ण पड़ोसी है। वहां आर्थिक अस्थिरता का असर क्षेत्रीय व्यापार, समुद्री संपर्क और द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है। वित्तीय सहायता और करेंसी स्वैप जैसी व्यवस्थाएं मालदीव को भुगतान संबंधी दबाव संभालने में मदद करती हैं, जबकि भारत के लिए यह क्षेत्रीय आर्थिक स्थिरता और पड़ोसी देशों के साथ सहयोग बनाए रखने का माध्यम हैं।
क्या रोलओवर से मालदीव को तुरंत राहत मिलेगी?
करेंसी स्वैप की समयसीमा बढ़ने से मालदीव को तय समय पर राशि लौटाने का तत्काल दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, राहत की अवधि, ब्याज या अन्य शर्तों और आगे के भुगतान की जानकारी संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगी। इसलिए इस फैसले को मालदीव की वित्तीय जरूरतों के लिए सहारा माना जा सकता है, लेकिन इसे कर्ज की समस्या पूरी तरह समाप्त होने के रूप में नहीं देखना चाहिए।



