HDFC Bank Share: 52 हफ्ते के लो पर शेयर, क्या खरीदें?

HDFC Bank के शेयर में लगातार गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। सितंबर 2026 में बैंक का स्टॉक लगातार नए 52-हफ्ते के निचले स्तरों को छू रहा है। मौजूदा गिरावट के बावजूद एनालिस्ट्स का एक वर्ग बैंक के लंबी अवधि के फंडामेंटल्स को देखते हुए Buy की राय बनाए हुए है।
उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार HDFC Bank का 52-हफ्ते का निचला स्तर करीब ₹681.90 और ऊपरी स्तर करीब ₹1,020.50 रहा है। शेयर अपने 52-हफ्ते के हाई से काफी नीचे कारोबार कर रहा है, जिससे निवेशकों का ध्यान वैल्यूएशन और संभावित रिकवरी पर गया है।
शेयर में कमजोरी के पीछे बैंक से जुड़ी नेतृत्व और कारोबारी चिंताएं भी चर्चा में हैं। CEO Sashidhar Jagdishan के नए कार्यकाल के लिए आगे नहीं बढ़ने के फैसले के बाद बाजार में उत्तराधिकार और रणनीतिक दिशा को लेकर सवाल उठे। इसी घटनाक्रम के बाद Jefferies ने अपना टारगेट प्राइस घटाया, हालांकि Buy रेटिंग बरकरार रखी।
Jefferies ने HDFC Bank के शेयर का टारगेट ₹1,050 से घटाकर ₹880 कर दिया है। ब्रोकरेज का यह संशोधन दिखाता है कि लंबी अवधि को लेकर सकारात्मक रुख कायम रहने के बावजूद मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए पहले के मुकाबले अधिक सतर्कता बरती जा रही है।
दूसरी ओर, कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि शेयर में मौजूदा कमजोरी लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बन सकती है। Trendlyne के उपलब्ध आंकड़ों में HDFC Bank का औसत एनालिस्ट टारगेट करीब ₹972.30 दिखता है, जो मौजूदा स्तरों से संभावित तेजी की गुंजाइश बताता है।
हालांकि केवल 52-हफ्ते के लो पर पहुंचना किसी शेयर के सस्ता होने की गारंटी नहीं है। HDFC Bank के मामले में निवेशकों को लोन ग्रोथ, डिपॉजिट ग्रोथ, नेट इंटरेस्ट मार्जिन, एसेट क्वालिटी और आने वाले नेतृत्व बदलाव जैसे पहलुओं पर भी नजर रखनी चाहिए। Q1FY27 में बैंक के लोन और डिपॉजिट ग्रोथ के आंकड़े मजबूत रहे थे।
ब्रोकरेज की राय भी पूरी तरह एक जैसी नहीं है और टारगेट समय के साथ बदल सकते हैं। इसलिए मौजूदा भाव को देखकर एकमुश्त निवेश करने के बजाय निवेशक अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि के अनुसार रणनीति बना सकते हैं। बाजार में शेयर के निचले स्तर की सटीक भविष्यवाणी करना संभव नहीं है।
इसलिए HDFC Bank का शेयर अभी Buy या Sell का सीधा जवाब देने के बजाय निगरानी योग्य स्टॉक माना जा सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बैंक के फंडामेंटल और नेतृत्व बदलाव महत्वपूर्ण रहेंगे, जबकि शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को तकनीकी कमजोरी को ध्यान में रखना चाहिए। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या SEBI-रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार से सलाह लेना बेहतर है।



