
भारत से विदेश यात्रा करने का खर्च तेजी से बढ़ रहा है। खासकर इंडिगो और अन्य कमर्शियल एयरलाइन की टिकटों में पिछले कुछ महीनों में असामान्य वृद्धि देखी गई है। जहां पहले कोई यात्री दिल्ली या मुंबई से दुबई की फ्लाइट के लिए लगभग 36,000 रुपये खर्च करता था, वहीं अब यही टिकट 1 लाख रुपये तक पहुंच गई है। इस वृद्धि का असर आम लोगों के साथ-साथ व्यवसायिक यात्रियों पर भी पड़ा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, टिकट महंगी होने के कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण है ईंधन की बढ़ती कीमतें और विदेशी मुद्राओं के मुकाबले रुपये की कमजोरी। इसके अलावा एयरलाइन कंपनियों के संचालन खर्च और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर मांग की वृद्धि ने भी टिकटों की कीमतें बढ़ा दी हैं। इंडिगो जैसी प्रमुख एयरलाइन ने हाल ही में अपने कई अंतरराष्ट्रीय रूट्स की कीमतें तीन गुना बढ़ा दी हैं, जिससे यात्रियों की जेब पर भारी असर पड़ा है।
दुबई जैसे लोकप्रिय डेस्टिनेशन की फ्लाइटें अब पहले की तुलना में तीन गुना महंगी हो गई हैं। केवल दुबई ही नहीं, बल्कि लंदन, सिंगापुर, और अमेरिका जैसी जगहों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय टिकटों में तेजी से वृद्धि हुई है। इससे पर्यटन उद्योग और बिजनेस ट्रैवलर्स दोनों प्रभावित हो रहे हैं। भारत से विदेशी यात्रा करने वाले छात्रों और कामकाजी पेशेवरों को भी अब यात्रा की योजना बनाने में मुश्किलें आ रही हैं।
सरकार और एयरलाइन कंपनियों के बीच कई स्तर पर बातचीत हो रही है ताकि यात्रियों पर अत्यधिक बोझ न पड़े। विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि यात्रा की योजना पहले से बनाकर और ऑफ-सीजन में फ्लाइट बुक करके यात्री थोड़ी राहत पा सकते हैं। इसके अलावा, लो-कॉस्ट एयरलाइन और नई फ्लाइट ऑपरेटरों की प्रतिस्पर्धा भी किराए को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है।
इस स्थिति में यात्रियों को सावधानीपूर्वक योजना बनानी होगी और अपनी यात्रा की प्राथमिकताओं के अनुसार फ्लाइट चुननी होगी। बढ़ते हवाई किराए ने न केवल आर्थिक दबाव बढ़ाया है बल्कि विदेश जाने की योजना रखने वाले लोगों के लिए नई चुनौतियां भी पेश की हैं। ऐसे समय में यात्रियों को ऑनलाइन टूल्स, ऑफर्स और फ्लाइट तुलना ऐप्स का सहारा लेना फायदेमंद साबित हो सकता है।



