Raghuram Rajan on GDP: 7.8% ग्रोथ पर उठाए सवाल, बोले- नौकरी इतनी कम क्यों?

भारत की GDP ग्रोथ को लेकर इस समय आर्थिक जगत में बहस तेज हो गई है। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो RBI के 7 प्रतिशत के अनुमान और अर्थशास्त्रियों के करीब 7.1 प्रतिशत के औसत अनुमान से कहीं ज्यादा रही।
इसी मजबूत ग्रोथ के बीच पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने GDP के आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि अगर भारत इतनी तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है तो अर्थव्यवस्था पर्याप्त संख्या में अच्छी नौकरियां क्यों नहीं पैदा कर रही है।
राजन ने रोजगार के साथ-साथ निवेश के मोर्चे पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि इतनी तेज आर्थिक वृद्धि के साथ अगर निवेश और रोजगार में उसी अनुपात में सुधार नहीं दिख रहा है, तो आंकड़ों और जमीनी अर्थव्यवस्था के बीच संभावित अंतर को समझना जरूरी है।
राजन ने GDP आंकड़ों को लेकर यह भी सवाल किया कि क्या मौजूदा ग्रोथ संख्या वास्तविक आर्थिक गतिविधियों को पूरी तरह दर्शाती है। उनके मुताबिक, अगर आंकड़ों में कोई विसंगति है तो उसे नजरअंदाज करना अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
हालांकि, भारत की 7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ को सिर्फ एक आंकड़े के तौर पर देखना भी सही नहीं होगा। इस तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 9.2 प्रतिशत और वित्तीय सेवाओं में 12.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। निजी निवेश में भी करीब 11.9 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी हुई।
निजी खपत भी अर्थव्यवस्था को मजबूती देती दिखाई दी। अप्रैल-जून तिमाही में उपभोक्ता खर्च में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू मांग फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ का महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है।
GDP के आंकड़ों पर उठे सवालों के बीच सांख्यिकी मंत्रालय ने भी स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने कहा है कि 7.8 प्रतिशत की वृद्धि किसी तकनीकी या कृत्रिम तरीके से बढ़ाई गई संख्या नहीं है। GDP की गणना में नई सीरीज, प्राइस डिफ्लेटर और अलग-अलग सेक्टरों के आंकड़ों को निर्धारित सांख्यिकीय प्रक्रिया के तहत शामिल किया गया है।
सरकार की ओर से भी GDP आंकड़ों का बचाव किया गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आंकड़ों पर सवाल उठाने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि मंत्री GDP डेटा तैयार नहीं करते और आधिकारिक आंकड़ों को लेकर नकारात्मक सोच नहीं रखनी चाहिए।
दरअसल, GDP की तेज वृद्धि और रोजगार के बीच संबंध इस बहस का सबसे अहम हिस्सा है। सिर्फ उत्पादन बढ़ना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि आर्थिक विस्तार से कितने नए और बेहतर रोजगार पैदा हो रहे हैं।
भारत के सामने रोजगार की चुनौती इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की बड़ी आबादी कामकाजी उम्र में है। ऐसे में आर्थिक वृद्धि को व्यापक रोजगार अवसरों में बदलना सरकार और निजी क्षेत्र दोनों के लिए बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।
दूसरी तरफ, मजबूत निवेश और मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ आने वाले समय में रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद कर सकती है। निजी क्षेत्र का पूंजी निवेश बढ़ना इस लिहाज से सकारात्मक संकेत है, हालांकि इसका असर रोजगार बाजार पर कितनी तेजी से दिखाई देता है, यह आने वाले आंकड़ों से स्पष्ट होगा।
कुल मिलाकर, भारत की 7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ ने अर्थव्यवस्था की मजबूती का सकारात्मक संकेत दिया है, लेकिन रघुराम राजन के सवालों ने रोजगार, निवेश और GDP की गुणवत्ता को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस शुरू कर दी है। फिलहाल सरकार आंकड़ों की विश्वसनीयता पर कायम है, जबकि आलोचक यह जानना चाहते हैं कि तेज GDP ग्रोथ का फायदा रोजगार और आम लोगों की आय तक कितनी तेजी से पहुंच रहा है।



