क्यूबा पर ट्रंप की नजर! ग्रीनलैंड, वेनेजुएला और ईरान के बाद Nickel-Cobalt के खजाने वाला देश चर्चा में

अमेरिकी राजनीति और वैश्विक रणनीति में संसाधनों की भूमिका हमेशा अहम रही है। ग्रीनलैंड, वेनेजुएला और ईरान जैसे देशों के बाद अब क्यूबा को लेकर भी नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजर क्यूबा के खनिज संसाधनों पर बताई जा रही है। कैरेबियन क्षेत्र में स्थित यह छोटा सा द्वीपीय देश प्राकृतिक संपदा के मामले में बेहद समृद्ध माना जाता है। खासतौर पर यहां पाए जाने वाले Nickel और Cobalt जैसे कीमती धातु आज की टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
क्यूबा दुनिया के प्रमुख Nickel उत्पादक देशों में गिना जाता है। Nickel का उपयोग स्टेनलेस स्टील, बैटरियों और कई आधुनिक औद्योगिक उपकरणों में किया जाता है। वहीं Cobalt इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों के लिए बेहद जरूरी तत्व है। जैसे-जैसे दुनिया में इलेक्ट्रिक कारों और नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकों की मांग बढ़ रही है, वैसे-वैसे इन खनिजों की रणनीतिक अहमियत भी तेजी से बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि क्यूबा जैसे संसाधन संपन्न देश पर बड़ी शक्तियों की नजर टिकना स्वाभाविक माना जा रहा है।
भौगोलिक रूप से क्यूबा कैरेबियन सागर में स्थित है और अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य से इसकी दूरी करीब 150 किलोमीटर के आसपास है। लंबे समय तक अमेरिका और क्यूबा के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। हालांकि समय-समय पर दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य करने की कोशिशें भी होती रही हैं। लेकिन खनिज संसाधनों और रणनीतिक स्थिति के कारण क्यूबा का महत्व हमेशा बना रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Nickel और Cobalt जैसे संसाधनों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा आने वाले वर्षों में और तेज हो सकती है। चीन, अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच इन धातुओं की सप्लाई को लेकर पहले से ही रणनीतिक होड़ चल रही है। ऐसे में क्यूबा का खनिज भंडार उसे वैश्विक राजनीति में एक अहम खिलाड़ी बना सकता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक क्यूबा को आने वाले समय में संसाधन-आधारित भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का नया केंद्र मान रहे हैं।



