Happy Patel Review: वीर दास की कॉमेडी फिल्म ‘हैप्पी पटेल’ क्यों है हल्की-फुल्की एंटरटेनमेंट

वीर दास की नई फिल्म ‘हैप्पी पटेल’ उन दर्शकों के लिए है जो सिनेमा हॉल या ओटीटी पर बैठकर किसी गहरी कहानी या दिमाग घुमा देने वाले ट्विस्ट की तलाश में नहीं रहते, बल्कि सिर्फ खुलकर हंसना चाहते हैं। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी सिंपल स्टोरी और बेफिक्र ट्रीटमेंट है। ‘हैप्पी पटेल’ एक ऐसे आम आदमी की कहानी है, जो हालातों में फंसता जरूर है, लेकिन हर मुश्किल को अपने अंदाज, मासूमियत और जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग से हल्का बना देता है। वीर दास ने एक बार फिर साबित किया है कि स्टैंड-अप कॉमेडी के साथ-साथ वह एक्टिंग में भी अपनी अलग पहचान रखते हैं। उनका किरदार बनावटी नहीं लगता, बल्कि आम जिंदगी से जुड़ा हुआ महसूस होता है। फिल्म के डायलॉग्स काफी कैजुअल हैं, लेकिन यही इसकी खूबसूरती है, क्योंकि कई सीन ऐसे हैं जहां हंसी अपने आप निकल जाती है। कहानी कहीं-कहीं प्रेडिक्टेबल जरूर लगती है, मगर मेकर्स ने इसे जानबूझकर ओवरस्मार्ट बनाने की कोशिश नहीं की। यही वजह है कि फिल्म दिमाग पर ज्यादा जोर नहीं डालती और दर्शक इसे बिना किसी स्ट्रेस के एंजॉय कर सकता है। सपोर्टिंग कास्ट ने भी अपनी भूमिका ईमानदारी से निभाई है और कई साइड कैरेक्टर ऐसे हैं जो स्क्रीन पर आते ही माहौल हल्का कर देते हैं। फिल्म का म्यूजिक कहानी पर हावी नहीं होता, बल्कि बैकग्राउंड में रहकर सीन को सपोर्ट करता है। सिनेमैटोग्राफी साधारण है, लेकिन कहानी की जरूरत के हिसाब से फिट बैठती है। निर्देशन में कोई बड़ा एक्सपेरिमेंट नहीं किया गया, मगर कॉमेडी को कंट्रोल में रखते हुए उसे ओवरएक्टिंग या जबरदस्ती की हंसी में नहीं बदला गया, जो काबिले-तारीफ है। अगर आप वीकेंड पर फैमिली या दोस्तों के साथ कुछ ऐसा देखना चाहते हैं, जिसमें ज्यादा सोचने की जरूरत न पड़े और हर 10–15 मिनट में मुस्कान आ जाए, तो ‘हैप्पी पटेल’ एक अच्छा ऑप्शन है। कुल मिलाकर यह फिल्म दिमाग को आराम और चेहरे पर मुस्कान देने वाली हल्की-फुल्की कॉमेडी है, जो वन टाइम वॉच के तौर पर जरूर देखने लायक है।



