15 अगस्त पर क्यों याद आता है ‘दुल्हन चली’ देशभक्ति गीत?

जब भी 15 अगस्त या गणतंत्र दिवस का मौका आता है, हिंदी सिनेमा के कई पुराने देशभक्ति गीत याद आ जाते हैं। इनमें मनोज कुमार की फिल्म Purab Aur Pachhim का ‘दुल्हन चली’ एक ऐसा गीत है, जो आज भी देशप्रेम की भावना को जगाने में कामयाब रहता है। फिल्म 1970 में रिलीज हुई थी और इस गीत को महेंद्र कपूर ने अपनी दमदार आवाज दी थी। संगीत कल्याणजी-आनंदजी का था और गीत इंदीवर ने लिखा था।
इस गाने की खासियत इसका अनोखा रूपक है। इसमें भारत को एक दुल्हन के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसके परिधान में तिरंगे के रंग दिखाई देते हैं। गीत के जरिए देश की विविधता, संस्कृति, बलिदान और राष्ट्रीय एकता को बेहद खूबसूरती से सामने रखा गया है।
गीत में गंगा-जमुना, हिमालय और तिरंगे जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों का जिक्र देश की पहचान को मजबूती देता है। साथ ही आजादी को हासिल करने के पीछे दिए गए बलिदानों की याद भी दिलाई जाती है। यही वजह है कि यह सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं रह जाता, बल्कि देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का संदेश भी देता है।
मनोज कुमार की फिल्मों में देशभक्ति हमेशा एक महत्वपूर्ण विषय रही। Upkar का ‘मेरे देश की धरती’ और Purab Aur Pachhim के कई गीतों ने उन्हें पर्दे पर ‘भारत’ की छवि से जोड़ दिया। उनके देशभक्ति गीतों ने उन्हें ‘Mr Bharat’ की पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई।
‘दुल्हन चली’ में महेंद्र कपूर की आवाज इस भावना को और प्रभावशाली बनाती है। मनोज कुमार और महेंद्र कपूर की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार देशभक्ति गीत दिए। ‘दुल्हन चली’ भी इसी सिलसिले की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
इस गीत की सबसे बड़ी खूबी यह है कि दशकों बीतने के बावजूद इसका संदेश पुराना नहीं लगता। देश की एकता, तिरंगे के सम्मान और भारतवासी होने की भावना आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। इसलिए स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जब पुराने देशभक्ति गीतों की प्लेलिस्ट चलती है, तो ‘दुल्हन चली’ की आवाज आज भी माहौल में देशप्रेम का रंग भर देती है।
मनोज कुमार के सिनेमा की यही विरासत है—देशभक्ति को केवल भाषण या संवाद तक सीमित न रखकर उन्होंने उसे गीत, कहानी और किरदारों के जरिए आम दर्शक की भावनाओं से जोड़ा। ‘दुल्हन चली’ इसी विरासत का ऐसा गीत है, जिसे सुनकर आज भी 15 अगस्त का जश्न और आजादी का महत्व एक साथ महसूस होता है।



