मनीषा कोइराला ने सुनाई कैंसर की कहानी

बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर से जुड़ा एक भावुक किस्सा साझा किया है। करीब 14 साल पहले उन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा था। हालिया बातचीत में उन्होंने उस समय को याद करते हुए बताया कि बीमारी की जानकारी मिलने के बाद की रात उनके लिए बेहद डरावनी थी।
मनीषा के मुताबिक 2012 में उन्हें लगातार कमजोरी महसूस हो रही थी। इसके बाद वह अपने भाई के साथ काठमांडू के एक अस्पताल गईं। जांच के बाद उन्हें पता चला कि वह स्टेज IV ओवेरियन कैंसर से जूझ रही हैं। इस खबर ने उनकी जिंदगी को अचानक बदल दिया।
अभिनेत्री ने बताया कि जिस दिन उन्हें कैंसर के बारे में पता चला, उसी रात उन्हें बेहद अकेलापन महसूस हुआ। उनके लिए वह रात इतनी लंबी और मुश्किल थी कि उन्हें लगा कि शायद वह मरने वाली हैं। उस समय बीमारी को लेकर डर और अनिश्चितता दोनों उनके सामने थे।
मनीषा ने यह भी बताया कि कैंसर के मरीज के तौर पर उन्हें पहली बार समझ आया कि गंभीर बीमारी इंसान को मानसिक रूप से कितना अकेला कर सकती है। उनके आसपास लोग होने के बावजूद उनके भीतर एक अलग तरह का अकेलापन था, जिसे उन्होंने अपने अनुभव से महसूस किया।
कैंसर की जानकारी मिलने के बाद मनीषा इलाज के लिए मुंबई आईं और बाद में अमेरिका गईं। न्यूयॉर्क स्थित मेमोरियल स्लोन-केटरिंग कैंसर सेंटर में उनकी सर्जरी हुई। 10 दिसंबर 2012 को उनकी सर्जरी की गई थी, जिसके बाद उन्हें कीमोथेरेपी से भी गुजरना पड़ा।
इलाज का दौर मनीषा के लिए आसान नहीं था। सर्जरी और कई चरणों की कीमोथेरेपी के बीच उन्होंने शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर काफी संघर्ष किया। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और लगातार इलाज करवाती रहीं।
करीब एक साल की लंबी लड़ाई के बाद मनीषा ने कैंसर को मात दी। 2014 में उनके कैंसर-मुक्त होने की खबर सामने आई। बीमारी से उबरने के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी को नए नजरिए से देखना शुरू किया और स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाने की दिशा में भी काम किया।
मनीषा की कैंसर जर्नी उनकी निजी जिंदगी के एक मुश्किल दौर से भी जुड़ी थी। 2012 में बीमारी का पता चलने से पहले ही उनकी शादीशुदा जिंदगी में परेशानी चल रही थी और उसी साल उनका तलाक भी हुआ। ऐसे समय में गंभीर बीमारी की जानकारी ने उनकी चुनौतियों को और बढ़ा दिया था।
अभिनेत्री ने अपनी कैंसर जर्नी को किताब ‘Healed’ में भी दर्ज किया है। इसमें उन्होंने बीमारी, इलाज और उससे जुड़े अपने अनुभवों को विस्तार से साझा किया है। उनका मानना है कि अपनी कहानी साझा करने से कैंसर से जूझ रहे लोगों को उम्मीद और हिम्मत मिल सकती है।
आज मनीषा कोइराला अपनी जिंदगी के उस कठिन अध्याय को पीछे छोड़ चुकी हैं, लेकिन उस दौर की यादें उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। 14 साल बाद भी उस रात को याद करते हुए वह भावुक हो जाती हैं। उनकी कहानी बताती है कि गंभीर बीमारी के बीच डर और अकेलेपन के बावजूद उम्मीद और हिम्मत के साथ आगे बढ़ना संभव है।



