कर्नल बी. संतोष बाबू, भारतीय सेना के उन वीर योद्धाओं में शामिल हैं, जिनकी शहादत ने न सिर्फ देश का सिर गर्व से ऊँचा किया, बल्कि चीन को भी यह संदेश दे दिया कि भारत की सरहदों को आंख दिखाने वालों को करारा जवाब मिलेगा। 15 जून 2020 की रात, जब गलवान घाटी की बर्फीली वादियों में भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने थे, तब कर्नल संतोष बाबू ने नेतृत्व, साहस और बलिदान की ऐसी मिसाल पेश की, जो इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाएगी।
तेलंगाना के सूर्यापेट जिले में जन्मे कर्नल बी. संतोष बाबू ने शुरू से ही देशसेवा को अपना लक्ष्य बनाया। NDA और IMA से ट्रेनिंग लेने के बाद वे 16 बिहार रेजिमेंट से जुड़े और कई अहम मोर्चों पर अपनी जिम्मेदारी निभाई। लेकिन उनकी वीरता का सबसे बड़ा प्रमाण गलवान घाटी में देखने को मिला, जब उन्होंने बिना हथियार के भी अपनी टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए चीनी सैनिकों को पीछे धकेल दिया।
गलवान संघर्ष में कर्नल बाबू और उनकी टीम ने अदम्य साहस दिखाया। यह संघर्ष केवल सैन्य बल का नहीं था, यह मनोबल, रणनीति और राष्ट्रभक्ति का संग्राम था। कर्नल बाबू ने आखिरी सांस तक अपने सैनिकों का हौसला बनाए रखा और अंततः मातृभूमि के लिए बलिदान हो गए। उनके नेतृत्व में भारतीय जवानों ने चीनी सेना को भारी नुकसान पहुँचाया, जिसे आज भी बीजिंग आधिकारिक रूप से स्वीकारने से कतराता है।
भारत सरकार ने उनकी वीरता और नेतृत्व को मान्यता देते हुए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया — यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि उस जज़्बे के लिए था, जो हर भारतीय सैनिक में समाया होता है।
कर्नल संतोष बाबू की शहादत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। लाखों लोगों ने सोशल मीडिया और सड़कों पर मोमबत्तियाँ जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनकी पत्नी और परिवार आज भी उनके अदम्य साहस को गर्व से याद करते हैं और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा बन चुके हैं।
कर्नल बाबू की कहानी केवल एक सैनिक की नहीं, एक प्रेरक नायक की है, जिसने यह दिखा दिया कि भारतीय सेना किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटती। उन्होंने ना केवल सीमा की रक्षा की, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश भी दिया कि जब बात देश की हो, तो हर एक कदम वीरता से उठाया जाना चाहिए।
आज भी जब गलवान घाटी की ओर नज़र जाती है, तो वहां की हवा में कर्नल संतोष बाबू की वीरता गूंजती है। उनका नाम भारतीय सेना के इतिहास में अमर हो गया है — एक सच्चे नायक, जिनकी गाथा हर भारतवासी को गर्व से भर देती है।



