उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के घेरे में आ गई है। मामला डिंपल यादव की एक मस्जिद में की गई एंट्री और उसके बाद पैदा हुए विवाद से जुड़ा है। इस घटना ने तब और तूल पकड़ लिया जब समाजवादी पार्टी (सपा) के कुछ कार्यकर्ताओं ने मौके पर मौजूद एक मौलाना को सरेआम थप्पड़ मार दिया। इसके बाद न केवल मुस्लिम धर्मगुरुओं ने विरोध दर्ज कराया, बल्कि भाजपा ने भी इस मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी और खासकर अखिलेश यादव को निशाने पर लिया है।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें यह साफ देखा जा सकता है कि डिंपल यादव मस्जिद के अंदर पहुंचती हैं और उनके साथ मौजूद सपाई कार्यकर्ता वहां मौजूद मौलाना से किसी बात को लेकर उलझते हैं। विवाद बढ़ता है और फिर उनमें से एक कार्यकर्ता मौलाना को थप्पड़ मार देता है। घटना के बाद धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाते हुए कई धर्मगुरुओं और संगठनों ने सपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
इस पूरे मामले पर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं अखिलेश यादव की चुप्पी को लेकर। विरोधी दलों का कहना है कि जब एक वरिष्ठ नेता और सांसद की मस्जिद में एंट्री को लेकर विवाद होता है, और धार्मिक नेता पर हाथ उठाया जाता है, तब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुप रहना कई सवाल खड़े करता है। भाजपा नेताओं ने इसे “सुनियोजित राजनीतिक स्टंट” करार देते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी अब धर्म की राजनीति करने लगी है, जो अत्यंत खतरनाक है।
मुस्लिम समाज के कई धर्मगुरुओं ने भी इस घटना पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को मस्जिद जैसे पवित्र स्थान का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए और वहां की परंपराओं व मर्यादाओं का सम्मान होना चाहिए। मौलाना के साथ हुई बदसलूकी को समुदाय ने गंभीरता से लिया है और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना से समाजवादी पार्टी की छवि पर गंभीर असर पड़ा है, खासकर उस वर्ग में जिसे वह अपना परंपरागत वोट बैंक मानती रही है। विपक्ष ने सवाल उठाए हैं कि क्या सपा अब अपने ही समर्थकों को साधने के लिए धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है? और यदि नहीं, तो फिर अखिलेश यादव सामने आकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहे?
अब देखना यह होगा कि सपा इस विवाद को शांत करने के लिए क्या कदम उठाती है, क्या मौलाना से माफी मांगी जाएगी, और क्या अखिलेश खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट करेंगे, या यह मामला भी अन्य विवादों की तरह राजनीतिक गलियारों में गुम हो जाएगा।



